2,276 मीटर पर बसा 'पहाड़ों की रानी' व यूनेस्को हेरिटेज रेलवे

शिमला: देवदार के वनों में बसी ब्रिटिश ग्रीष्मकालीन राजधानी व दि रिज

हिमालय की शिवालिक उपत्यकाओं में सात पहाड़ियों पर फैला शिमला कभी 1864 से 1947 तक समूचे ब्रिटिश साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा था। 2,276 मीटर की ऊंचाई पर देवदार, चीड़ और बांज के सघन वनों से घिरा यह नगर आज भी नव-गॉथिक शैली के क्राइस्ट चर्च, ऐतिहासिक रिज मैदान, जाखू पहाड़ी पर 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, 1903 की यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला टॉय ट्रेन और वाइसरीगल लॉज के औपनिवेशिक वैभव का जीवंत साक्ष्य है।

Shimla (हिमाचल प्रदेश): मुख्य विवरण एवं यात्रा सांख्यिकी
समुद्र तल से ऊंचाई
2,276 मीटर (7,467 फीट)
ऐतिहासिक दर्जा
ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी (1864-1947)
यूनेस्को धरोहर
कालका-शिमला माउंटेन रेलवे (2008)
निकटतम हवाई अड्डा
जुब्बरहट्टी एयरपोर्ट (SLV - 22 किमी)
प्रमुख मार्ग
कालका से एनएच-5 (हिमालयन एक्सप्रेसवे)
सर्वोत्तम समय
मार्च से जून (ग्रीष्मकालीन ठंडक) व दिसंबर-फरवरी (बर्फबारी)

प्रमुख दर्शनीय स्थल एवं प्राकृतिक धरोहर

हेरिटेज स्थल दि रिज एवं क्राइस्ट चर्च

दि रिज एवं क्राइस्ट चर्च

1857 में निर्मित उत्तर भारत का दूसरा प्राचीनतम एंग्लिकन चर्च, जिसकी रंगीन कांच की खिड़कियां और खुली रिज शिमला का हृदय हैं।

शिखर तीर्थ जाखू मंदिर एवं हनुमान प्रतिमा

जाखू मंदिर एवं हनुमान प्रतिमा

शिमला की सबसे ऊंची जाखू पहाड़ी (2,455 मी.) पर स्थित पौराणिक मंदिर, जहां रामायण काल में संजीवनी बूटी खोजते लक्ष्मण जी हेतु हनुमान जी ने विश्राम किया था।

यूनेस्को रेल कालका-शिमला हेरिटेज टॉय ट्रेन

कालका-शिमला हेरिटेज टॉय ट्रेन

96 किमी की यात्रा में 102 सुरंगों, 800 से अधिक मेहराबदार पुलों और 919 घुमावों से गुजरने वाली 1903 की यूनेस्को नैरो-गेज रेलवे।

ऐतिहासिक लॉज भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (वाइसरीगल लॉज)

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (वाइसरीगल लॉज)

ऑब्जर्वेटरी हिल पर 1888 में लॉर्ड डफरिन द्वारा बनवाया गया जैकोबीथन शैली का भव्य प्रासाद, जहां भारत विभाजन की ऐतिहासिक शिमला कॉन्फ्रेंस हुई थी।

1. शामला माता के नाम से ब्रिटिश साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन सत्ता तक

1819 में गोरखा युद्ध के उपरांत लेफ्टिनेंट चार्ल्स पैट कैनेडी ने जब इस पहाड़ी पर पहली लकड़ी की कॉटेज बनाई, तब यह केवल शामला देवी (भगवती काली का रूप) के एक छोटे मंदिर के निकट का शांत पहाड़ी गांव था। 1864 में वायसराय सर जॉन लॉरेंस ने शिमला को औपचारिक रूप से ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया। इसके बाद 80 वर्षों तक प्रत्येक ग्रीष्म ऋतु में बर्मा से लेकर बलूचिस्तान और पेशावर तक का शासन इसी 7 पहाड़ियों के नगर से संचालित होता था। आज भी माल रोड पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है, जिससे पैदल चलने वालों के लिए औपनिवेशिक शांति बरकरार है।

2. वाइसरीगल लॉज: जहां लिखी गई इतिहास की पटकथाएं

ऑब्जर्वेटरी हिल पर स्थित वाइसरीगल लॉज (वर्तमान में आईआईएएस) भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक भवनों में से एक है। टीक की लकड़ी और स्थानीय हल्के नीले पत्थरों से निर्मित इस भवन में उस दौर का पहला इनडोर इलेक्ट्रिक लाइट सिस्टम लगा था। इसी भवन के टेबल पर 1945 का शिमला सम्मेलन और 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के नक्शे पर चर्चाएं हुई थीं। आज यहां शोधकर्ताओं का विश्वस्तरीय पुस्तकालय और सुंदर अंग्रेजी लॉन हैं।

3. जाखू पहाड़ी का आध्यात्मिक आकर्षण और कुफरी का रोमांच

जाखू पहाड़ी तक पहुंचने के लिए रिज से modern जाखू रोपवे उपलब्ध है जो 5 मिनट में घने देवदार के पेड़ों के ऊपर से उड़ते हुए शिखर तक पहुंचाता है। शिखर पर 108 फीट ऊंची सिंदूरी हनुमान प्रतिमा दूर घाटियों से दिखाई देती है। शिमला से 16 किमी आगे स्थित कुफरी सर्दियों में स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और याक सफारी के लिए विख्यात है, जबकि पास ही नालदेहरा में 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा डिजाइन किया गया भारत का प्राचीनतम 9-होल गोल्फ कोर्स स्थित है।

4. पहाड़ी ज़ायका और माल रोड की सांस्कृतिक चहलपहल

शिमला के माल रोड पर टहलते हुए पुराने कैफे में बेक्ड एप्पल पाई, हॉट चॉकलेट, सिड्डू (घी में डुबोकर खाया जाने वाला भाप में पका अखरोट-मसाला रोटी), और माश दाल का स्वाद अत्यंत लोकप्रिय है। लक्कड़ बाजार में स्थानीय कारीगरों द्वारा चीड़ व देवदार की लकड़ी से बनाई गई पारंपरिक छड़ियां, खिलौने और नक्काशीदार स्मृति चिन्ह मिलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कालका-शिमला टॉय ट्रेन की टिकट कैसे बुक करें?

टॉय ट्रेन की बुकिंग IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.co.in) से सामान्य ट्रेनों की तरह की जा सकती है। पर्यटन के सीजन में सीटें 2-3 महीने पहले ही भर जाती हैं।

शिमला में बर्फबारी देखने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

शिमला और कुफरी में बर्फबारी आमतौर पर दिसंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर फरवरी के मध्य तक होती है।

शिमला में माल रोड पर गाड़ियां क्यों नहीं चलतीं?

ब्रिटिश काल से ही माल रोड और रिज को केवल पैदल यात्रियों के लिए संरक्षित रखा गया है। यहां केवल आपातकालीन एम्बुलेंस व अग्निशामक वाहनों को विशेष अनुमति मिलती है।

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