गुलमर्ग गोंडोला (फेज 1 एवं फेज 2)
एशिया की सर्वोच्च केबल कार, जो कोंगदूरी (3,050 मी.) होते हुए अफरवात पीक (3,980 मी.) तक ले जाती है, जहां से एलओसी और नंगा पर्वत तक दिखता है।
श्रीनगर से मात्र 50 किमी दूर पीर पंजाल पर्वतमाला के ऊंचे ढलानों पर 2,650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग भारत का सबसे विख्यात और अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्वतीय विंटर-स्पोर्ट्स रिसॉर्ट है। 16वीं शताब्दी में कश्मीर के सुल्तान यूसुफ शाह चक ने इसकी असीम हरियाली और जंगली फूलों की बहार देखकर इसका नाम 'गौरीमर्ग' से बदलकर 'गुलमर्ग' (फूलों का मैदान) रखा था। सर्दियों में 10-15 फीट मोटी बर्फ की मखमली चादर में लिपटने वाला यह नगर एशिया की सबसे ऊंची और विश्व की दूसरी सबसे ऊंची केबल कार 'गुलमर्ग गोंडोला' (जो 3,980 मीटर अफरवात चोटी तक ले जाती है) और विश्वस्तरीय स्कीइंग व स्नोबोर्डिंग का केंद्र है।
एशिया की सर्वोच्च केबल कार, जो कोंगदूरी (3,050 मी.) होते हुए अफरवात पीक (3,980 मी.) तक ले जाती है, जहां से एलओसी और नंगा पर्वत तक दिखता है।
गोंडोला फेज-2 के शीर्ष पर स्थित विशाल बर्फीली चोटी, जहां साल भर बर्फ जमी रहती है और पास ही अल्पाइन झील स्थित है।
1902 में ब्रिटिश काल में निर्मित 120 वर्ष पुराना सुरम्य पाषाण चर्च, जिसकी हरी छत सर्दियों में बर्फ की सफेद टोपी जैसी दिखती है।
2,650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व के सर्वोच्च ग्रीन गोल्फ कोर्स में से एक, जिसकी स्थापना 1911 में अंग्रेजों ने की थी।
गुलमर्ग का मूल नाम 'गौरीमर्ग' था, जो भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती (गौरी) का चरागाह माना जाता था। 16वीं सदी में कश्मीर के अंतिम स्वतंत्र शासक सुल्तान यूसुफ शाह चक और उनकी कवयित्री रानी हब्बा खातून ने यहां कई ग्रीष्मकालीन विश्राम गृह बनवाए। वे अक्सर श्रीनगर की गर्मी से बचकर यहां आते थे और घाटी में खिलने वाले 21 विभिन्न प्रजातियों के जंगली फूलों की महक का आनंद लेते थे। ब्रिटिश काल में 1927 में यहां स्की क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना हुई जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय विंटर स्पोर्ट्स गंतव्य बनाया।
गुलमर्ग गोंडोला दुनिया के सबसे रोमांचक रोपवे अनुभवों में से एक है। फ्रांसीसी कंपनी पोमा के सहयोग से निर्मित इस केबल कार के दो चरण हैं: पहला चरण गुलमर्ग रिज से कोंगदूरी घाटी (3,050 मीटर) तक जाता है जहां शुरुआती स्कीइंग और स्लेजिंग होती है। दूसरा चरण कोंगदूरी से अफरवात चोटी के ठीक नीचे 3,980 मीटर तक पहुंचता है। केबल कार की खिड़की से नीचे देवदार के विशाल वृक्ष माचिस की तीलियों जैसे छोटे दिखते हैं और चारों तरफ बर्फीली चोटियों का 360-डिग्री कैनवास खुल जाता है।
गुलमर्ग को अंतरराष्ट्रीय स्कीयरों के बीच 'पाउडर स्नो' (शुष्क, हल्की और फिसलन रहित बर्फ) का मक्का माना जाता है। हिमालय की ऊंचाई और शुष्क हवा के कारण यहां की बर्फ आल्प्स की तुलना में अधिक भुरभुरी और स्कीइंग के लिए आदर्श होती है। भारतीय स्कीइंग और पर्वतारोहण संस्थान (IISM) यहां 14 दिवसीय बेसिक और इंटरमीडिएट स्कीइंग कोर्स संचालित करता है। अंतरराष्ट्रीय फ्री-राइडर्स अफरवात की खड़ी ढलानों पर ऑफ-पिस्ट स्कीइंग का लुत्फ उठाते हैं।
गुलमर्ग के केंद्र में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित 'महारानी मंदिर' (मोहिनेश्वर शिवालय) 1915 में राजा हरि सिंह की महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया द्वारा बनवाया गया था। तांगमर्ग से गुलमर्ग की 12 किमी की तीखी चढ़ाई पर सर्दियों में केवल स्नो-चेन लगी गाड़ियां ही चढ़ पाती हैं। बर्फ में घंटों घूमने के बाद लकड़ी के अंगीठी वाले रेस्तरां में बैठकर ताजी मटन टिक्का कबाब और केसरिया कहवे का घूंट लेना शरीर में नई ऊर्जा भर देता है।
गोंडोला की टिकट केवल आधिकारिक पोर्टल jammukashmircablecar.com से ऑनलाइन बुक होती है। ध्यान रहे कि फेज-2 की टिकटें सीजन में 1 से 2 महीने पहले ही बिक जाती हैं, इसलिए यात्रा से काफी पहले बुकिंग अनिवार्य है।
सर्दियों में भारी बर्फबारी और सड़क पर फिसलन (ब्लैक आइस) के कारण तांगमर्ग से आगे सामान्य गाड़ियां नहीं जाने दी जातीं। तांगमर्ग में टायरों पर लोहे की चेन (Snow Chains) बंधी स्थानीय 4x4 टैक्सियां किराए पर लेनी होती हैं।
जनवरी और फरवरी के महीने स्कीइंग सीखने के लिए सबसे उपयुक्त हैं जब बर्फ की परत सबसे गहरी (6 से 10 फीट) और उत्तम गुणवत्ता वाली होती है।
पर्वतों, घाटियों, मठों और झीलों की विस्तृत जानकारी के लिए राज्य पोर्टल पर जाएं।
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