लॉर्ड कर्जन का 'पूर्व का वेनिस' व समुद्र तल से नीचे धान उपजाने वाला कुट्टनाड

अलप्पुझा: बैकवाटर्स की जल-धमनियां, केट्टुवल्लम हाउसबोट एवं वेम्बनाड

अरब सागर और भारत की सबसे लंबी 96 किमी की वेम्बनाड झील के बीच नहरों, लैगूनों और खजूर के झुरमुटों में बसा अलप्पुझा (अल्लेप्पी) केरल के बैकवाटर्स का निर्विवाद मुकुट है। 20वीं सदी के प्रारंभ में भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने इसकी जटिल जल-प्रणाली और नौका-संस्कृति से मुग्ध होकर इसे 'पूर्व का वेनिस' (Venice of the East) की उपाधि दी थी। कभी धान और मसालों के परिवहन हेतु प्रयुक्त होने वाली पारंपरिक लकड़ी की नौकाओं 'केट्टुवल्लम' से विकसित आधुनिक लक्जरी हाउसबोट्स, समुद्र तल से नीचे खेती करने वाला भारत का एकमात्र क्षेत्र 'कुट्टनाड', और पुन्नमदा झील पर 100-नाविकों वाली सर्प नौकाओं (चंदन वल्लम) की 'नेहरू ट्रॉफी बोट रेस' अलप्पुझा को दुनिया का अनोखा जल-स्वर्ग बनाते हैं।

Alleppey (केरल): मुख्य विवरण एवं यात्रा सांख्यिकी
वैश्विक उपनाम
पूर्व का वेनिस (Venice of the East)
प्रमुख झील
वेम्बनाड झील (भारत की सबसे लंबी झील - 96.5 किमी)
पारंपरिक नौका
केट्टुवल्लम (बिना कील के, केवल नारियल रस्सियों से बंधी)
भौगोलिक अजूबा
कुट्टनाड (समुद्र तल से 2 से 3 मीटर नीचे धान की खेती)
निकटतम हवाई अड्डा
कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (COK - 85 किमी)
सर्वोत्तम समय
सितंबर से मार्च (अगस्त में नेहरू ट्रॉफी बोट रेस)

प्रमुख दर्शनीय स्थल एवं सांस्कृतिक धरोहर

सिग्नेचर क्रूज वेम्बनाड बैकवाटर्स हाउसबोट क्रूज

वेम्बनाड बैकवाटर्स हाउसबोट क्रूज

नारियल के पेड़ों से छनती धूप और जलकुंभी से भरी नहरों में तैरती निजी हाउसबोट, जहां रात का ठहराव और ताजी कल्लड़ा करी मिलती है।

कृषि धरोहर कुट्टनाड (केरल का धान का कटोरा)

कुट्टनाड (केरल का धान का कटोरा)

विश्व के उन गिने-चुने क्षेत्रों में शामिल जहां समुद्र तल से 4 से 10 फीट नीचे बायो-सलाइन तकनीक से धान की समृद्ध खेती की जाती है।

जल महा-उत्सव नेहरू ट्रॉफी स्नेक बोट रेस (पुन्नमदा)

नेहरू ट्रॉफी स्नेक बोट रेस (पुन्नमदा)

अगस्त के दूसरे शनिवार को आयोजित होने वाली महा-दौड़, जिसमें 100 से अधिक नाविक 100 फीट लंबी 'चंदन वल्लम' को तालबद्ध लय में दौड़ाते हैं।

ऐतिहासिक तट अलप्पुझा बीच एवं 160 वर्ष पुराना लाइटहाउस

अलप्पुझा बीच एवं 160 वर्ष पुराना लाइटहाउस

अरब सागर का रेतीला तट जहां 1862 में बना 1,000 फीट लंबा पुराना लकड़ी का समुद्री पियर और लाल-सफेद पट्टियों वाला लाइटहाउस है।

1. राजा केशवदास और एक व्यापारिक बंदरगाह की रचना

18वीं सदी के अंत में त्रावणकोर के दूरदर्शी दीवान राजा केशवदास ने घने दलदल और नहरों को काटकर एक आधुनिक बंदरगाह नगर की नींव रखी। उन्होंने सिंधी, गुजराती और पारसी व्यापारियों को यहां बसने के लिए आमंत्रित किया और नारियल जटा (कॉयर), काली मिर्च, अदरक और इलायची के निर्यात का केंद्र बनाया। नहरों का जाल इसलिए बनाया गया था ताकि भीतरी गांवों से भारी कृषि उत्पाद नावों द्वारा सीधे समुद्र के जहाजों तक पहुंचाए जा सकें।

2. केट्टुवल्लम: बिना किसी कील के बना जल प्रासाद

आज जिन हाउसबोट्स में दुनिया भर के पर्यटक ठहरते हैं, उन्हें पारंपरिक रूप से 'केट्टुवल्लम' कहा जाता है। मलयालम में 'केट्टू' का अर्थ है 'बांधना' और 'वल्लम' का अर्थ है 'नाव'। यह नाव अंजलि (जंगली कटहल) की लकड़ी के बड़े तख्तों से बनाई जाती है, जिन्हें बिना एक भी लोहे की कील ठोके, केवल नारियल के जटा से बनी मोटी रस्सियों से बांधा जाता है और ऊपर से काले राल व मछली के तेल का वाटरप्रूफ लेप लगाया जाता है। आज इन पर वातानुकूलित शयनकक्ष, आधुनिक शौचालय, खुला बालकनी डेक और निजी रसोइया मौजूद होता है।

3. बैकवाटर जीवन: नहरों के किनारे की शांत दिनचर्या

हाउसबोट या छोटी शिकारा नाव में सवार होकर भीतरी संकरी नहरों में घूमना ग्रामीण केरल की अंतरंग झांकी दिखाता है। घरों के सामने आंगन में पानी बहता है जहां बच्चे नावों से स्कूल जाते हैं, महिलाएं बर्तनों को साफ करती हैं और मछुआरे चीनी जालों से 'करीमीन' (Pearl Spot) मछली पकड़ते हैं। सूर्यास्त के समय जब झील का जल एकदम शांत हो जाता है और मंदिर की घंटियों के साथ पक्षी चहचहाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे समय ठहर गया हो।

4. कल्लड़ा का भोजन: करीमीन पोल्लिचाथु और अप्पम

हाउसबोट पर परोसा जाने वाला भोजन केरल की तटीय पाककला का शिखर है। झील से ताजी पकड़ी गई 'करीमीन' को अदरक, लहसुन, करी पत्ता और लाल मिर्च के मसाले में लपेटकर केले के पत्ते में धीमी आंच पर सेका जाता है जिसे 'करीमीन पोल्लिचाथु' कहते हैं। इसके साथ गरमा-गरम फूले हुए अप्पम, नारियल के दूध में पकी झींगा (Prawn) करी, और स्थानीय कुट्टनाडी चावल का स्वाद कभी नहीं भुलाया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अल्लेप्पी में डे क्रूज और नाइट स्टे हाउसबोट में क्या अंतर है?

डे क्रूज सुबह 11:30 से शाम 5:30 तक चलता है जिसमें दोपहर का भोजन शामिल होता है। नाइट स्टे हाउसबोट दोपहर 12:00 बजे चेक-इन होकर अगली सुबह 9:00 बजे चेक-आउट होती है, जिसमें शाम की चाय, रात का भोजन, जल में ठहराव और नाश्ता शामिल होता है।

हाउसबोट की बुकिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

हमेशा केरल पर्यटन (DTPC) द्वारा अधिकृत 'ग्रीन पाम' या 'गोल्ड स्टार' प्रमाणित हाउसबोट ही चुनें। पुष्टि करें कि एसी (AC) रात में कितने बजे से कितने बजे तक चलेगा और क्या बोट संकरी नहरों में जाती है।

नेहरू ट्रॉफी स्नेक बोट रेस किस महीने में होती है?

नेहरू ट्रॉफी बोट रेस हर साल अगस्त के दूसरे शनिवार को अलप्पुझा की पुन्नमदा झील में आयोजित की जाती है। इसके लिए टिकट ऑनलाइन पहले से बुक करानी होती है।

केरल के अन्य दर्शनीय स्थल एवं तटीय मार्ग देखें

मंदिरों, बैकवाटर्स, समुद्र तटों और हिल स्टेशनों की विस्तृत जानकारी के लिए राज्य पोर्टल पर जाएं।

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