गेटवे ऑफ इंडिया एवं कोलाबा
1911 में किंग जॉर्ज पंचम के आगमन पर बना 26 मीटर ऊंचा पीले बेसाल्ट पत्थर का विशाल मेहराब, जहां से एलिफेंटा गुफाओं की नावें खुलती हैं।
अरब सागर के कछार पर कभी सात दलदली द्वीपों (बॉम्बे, कोलाबा, ओल्ड वूमन्स आइलैंड, माहिम, मझगांव, परेल और वर्ली) के रूप में बसी मुंबई आज भारत की धड़कती आर्थिक, सिनेमाई और सांस्कृतिक राजधानी है। स्थानीय मछुआरा समुदाय 'कोली' की कुलदेवी मुंबादेवी के नाम पर बसा यह शहर 1924 के ब्रिटिश कालीन गेटवे ऑफ इंडिया, 1887 के यूनेस्को विश्व धरोहर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), रात में जगमगाते मरीन ड्राइव के 'क्वीन्स नेकलेस', और धारावी की अदम्य उद्यमशीलता का अद्वितीय प्रतीक है।
1911 में किंग जॉर्ज पंचम के आगमन पर बना 26 मीटर ऊंचा पीले बेसाल्ट पत्थर का विशाल मेहराब, जहां से एलिफेंटा गुफाओं की नावें खुलती हैं।
वास्तुकार एफ.डब्ल्यू. स्टीवंस द्वारा डिजाइन किया गया विक्टोरियन इटैलियन-गोथिक शैली का भव्य रेलवे स्टेशन, यूनेस्को धरोहर।
नरीमन पॉइंट से मालाबार हिल तक 3.6 किमी का सी-फेसिंग प्रोमेनेड, जिसकी रात की स्ट्रीट लाइटें मोतियों के हार जैसी दिखती हैं।
मुंबई हार्बर में 10 किमी दूर द्वीप पर स्थित 6वीं सदी की शैलकृत शैव गुफाएं, जहां भगवान शिव की 20 फीट ऊंची त्रिमूर्ति प्रतिमा स्थित है।
1661 में जब पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगेंज़ा का विवाह इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय से हुआ, तो यह सात छोटे द्वीप अंग्रेजों को दहेज में मिले थे। 1784 से 1845 के बीच गवर्नर विलियम हॉर्नबी की देखरेख में 'हॉर्नबी वेल्लार्ड' इंजीनियरिंग परियोजना के तहत समुद्री खाड़ियों को पाटकर इन सातों द्वीपों को एक विशाल भूभाग में बदल दिया गया। सूती मिलों, पारसी व गुजराती व्यापारियों के उद्यम और 1853 में बोरीबंदर से ठाणे के बीच भारत की पहली रेल चलने के बाद मुंबई देश का सबसे बड़ा बंदरगाह और औद्योगिक केंद्र बन गया।
मुंबई में मियामी के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा 'आर्ट डेको' भवनों का संकलन है। ओवल मैदान के एक तरफ जहां बॉम्बे हाईकोर्ट, राजाबाई क्लॉक टॉवर और मुंबई विश्वविद्यालय की विक्टोरियन गोथिक इमारतें गगनचुंबी छतरियों और गार्गॉयल्स के साथ खड़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ बैकबे रिक्लेमेशन के किनारे 1930 के दशक के सुव्यवस्थित आर्ट डेको अपार्टमेंट्स और सिनेमा हॉल (इरोस, रीगल) स्थित हैं। इस ऐतिहासिक तालमेल को 2018 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया।
मुंबई का हृदय उसके बहुधार्मिक श्रद्धा केंद्रों में धड़कता है। प्रभादेवी में स्थित 200 वर्ष प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश की दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली स्वयंभू प्रतिमा की पूजा होती है, जहां राजनेता, उद्योगपति और आम नागरिक माथा टेकते हैं। वर्ली तट से 500 मीटर समुद्र के भीतर एक छोटी चट्टान पर स्थित 15वीं सदी की हाजी अली दरगाह तक पहुंचने का संकरा रास्ता केवल कम ज्वार (Low Tide) के समय ही खुलता है, जो सूफी कव्वालियों और लहरों की गूंज का संगम है।
मुंबई की ऊर्जा उसके भोजन में समाई है। 1966 में दादर स्टेशन के बाहर अशोक वैद्य द्वारा शुरू किया गया लहसुन-मिर्च की चटनी वाला 'वड़ा पाव' आज शहर का ग्लोबल सिंबल है। इसके अतिरिक्त सरदार पाव भाजी (ताड़देव), मोहम्मद अली रोड का मुगलाई कबाब, गिरगांव चौपाटी की भेलपूरी, और दक्षिण मुंबई के पुराने पारसी/ईरानी कैफे (ब्रिटानिया, कयानी) में मिलने वाला बेरी पुलाव और बन-मस्का चाय मुंबई की आत्मा हैं।
एलिफेंटा की बोट्स गेटवे ऑफ इंडिया की जेटी से सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक प्रत्येक 30 मिनट में चलती हैं। यात्रा में लगभग 1 घंटा लगता है (सोमवार को गुफाएं बंद रहती हैं)।
सुबह 8:30 से 11:00 और शाम 5:30 से 8:30 के पीक आवर्स में लोकल ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होती है। पर्यटकों को गैर-पीक समय (दोपहर 12:00 से 4:00) में ही यात्रा करनी चाहिए और यूटीएस (UTS) ऐप से टिकट लेनी चाहिए।
फिल्म सिटी (गोरेगांव) में महाराष्ट्र पर्यटन (MTDC) द्वारा अधिकृत गाइडेड बॉलीवुड टूर संचालित किए जाते हैं, जिनकी बुकिंग mtdc.co.in पर ऑनलाइन की जा सकती है।
किलों, महलों, गुफाओं और तीर्थों की विस्तृत जानकारी के लिए राज्य पोर्टल पर जाएं।
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