भारत का आधिकारिक प्रोजेक्ट टाइगर महा-ज्ञानकोश

भारत के राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves)

मध्य प्रदेश के साल वनों से लेकर सह्याद्रि के सदाबहार अरण्यों और सुंदरबन के मैंग्रोव डेल्टा तक — भारत के सभी प्रोजेक्ट टाइगर अभयारण्यों की आधिकारिक सफारी गाइड, जोन परमिट, बाघ घनत्व एवं वन्यजीव यात्रा निर्देशिका।

55+ प्रोजेक्ट टाइगर अभयारण्य
75%+ विश्व के कुल बाघों की आबादी
100% सत्यापित सफारी गाइड

प्रोजेक्ट टाइगर: भारतीय वन्यजीव संरक्षण की गौरवशाली गाथा

1973 में प्रारंभ हुआ 'प्रोजेक्ट टाइगर' विश्व के सबसे सफलतम वन्यजीव संरक्षण अभियानों में से एक है। भारत आज विश्व के 75% से अधिक जंगली बाघों का प्राकृतिक पर्यावास है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तराखंड और असम के संरक्षित वनों ने न केवल राष्ट्रीय पशु बाघ को विलुप्ति के कगार से बचाया, बल्कि संपूर्ण वनीय पारिस्थितिकी तंत्र और जलग्रहण क्षेत्रों को भी संरक्षित किया है।

1. कोर जोन बनाम बफर जोन सफारी

कोर जोन (Core Zone): अभयारण्य का अति-संवेदनशील आंतरिक वन क्षेत्र जहां मानवीय गतिविधियां पूर्णतः प्रतिबंधित रहती हैं। यहां बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार की संभावना सर्वाधिक होती है।

बफर जोन (Buffer Zone): कोर क्षेत्र के चारों ओर फैला वनीय सुरक्षा घेरा जो पर्यटकों के लिए पूरे वर्ष खुला रहता है और रात्रि सफारी की विशेष सुविधा प्रदान करता है।

2. सफारी परमिट बुकिंग एवं दिशानिर्देश

सभी प्रमुख टाइगर रिजर्वों की सफारी बुकिंग संबंधित राज्य वन विभाग के अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल से अग्रिम रूप से की जाती है। सफारी के दौरान वन विभाग के नियमों का पालन करें, शांत रहें, चमकीले वस्त्रों से बचें और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें।