नैनी झील एवं नौकायन
1.5 किमी लंबी प्राकृतिक मीठे पानी की झील, जिसके दोनों सिरों को मल्लीताल और तल्लीताल कहा जाता है; बोटिंग और याचिंग का केंद्र।
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में सात हरी-भरी पहाड़ियों (अयारपाटा, देवपाटा, हांडी-बांडी, चीना/नैना पीक, अल्मा, शेर-का-डांडा और लरिया-कांटा) के मध्य 2,084 मीटर की ऊंचाई पर आंख (नाशपाती) के आकार में फैली नैनीताल झील भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय और सुरम्य पर्वतीय स्थलों में से एक है। 51 शक्तिपीठों में शामिल मां नैना देवी का पवित्र देवालय (जहां सती का बायां नयन गिरा था), झील के शांत पन्ना-हरे जल पर तैरती रंग-बिरंगी पाल नौकाएं (याचिंग), 2,615 मीटर ऊंचा नैना पीक जहां से नंदा देवी और त्रिशूल चोटियों का 360-डिग्री हिम-दर्शन होता है, और 1897 का राजभवन नैनीताल को कुमाऊं की रानी बनाते हैं।
1.5 किमी लंबी प्राकृतिक मीठे पानी की झील, जिसके दोनों सिरों को मल्लीताल और तल्लीताल कहा जाता है; बोटिंग और याचिंग का केंद्र।
झील के उत्तरी छोर पर स्थित पावन मंदिर, जहां सती के नयनों के प्रतीक दो नेत्रों की स्वयंभू रूप में पूजा होती है।
2,270 मीटर की ऊंचाई पर स्थित व्यू पॉइंट, जहां माल रोड से एरियल रोपवे द्वारा पहुंचकर नंदा देवी और हिमालय की बर्फानी चोटियां दिखती हैं।
नैनीताल का सर्वोच्च बिंदु, जहां रोडोडेंड्रोन और देवदार के वनों से गुजरकर हिमालयी ग्लेशियरों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
स्कंद पुराण के मानसखंड में नैनीताल का उल्लेख 'त्रि-ऋषि सरोवर' के रूप में मिलता है। मान्यता है कि जब अत्रि, पुलस्त्य और पुलह ऋषि यहां पहुंचे और उन्हें जल नहीं मिला, तो उन्होंने मानसरोवर झील का ध्यान करके यहां एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर का पवित्र जल इसमें प्रवाहित किया। 1841 में एक अंग्रेज चीनी व्यापारी पी. बैरन ने शिकार के दौरान इस गुप्त झील को खोजा और ब्रिटिश अधिकारियों को इसकी सूचना दी। 1862 में नैनीताल को यूनाइटेड प्रोविंसेज (आधुनिक उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया।
नैनीताल का हृदय नैना देवी मंदिर है। 18 सितंबर 1880 को भारी मानसूनी वर्षा के कारण शेर-का-डांडा पहाड़ी पर भयंकर भूस्खलन हुआ जिसमें 151 लोग दब गए और मूल नैना देवी मंदिर झील में समा गया। 1883 में स्थानीय श्रद्धालुओं और राजाओं ने झील के किनारे वर्तमान भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। नवरात्रि में यहां लगने वाला मेला कुमाऊं की लोक संस्कृति का सबसे बड़ा उत्सव होता है जहां छोलिया नर्तक अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।
नैनीताल के आसपास 25 किमी के दायरे में झीलों का एक पूरा जाल फैला है। 'भीमताल' नैनीताल से बड़ी झील है जिसके केंद्र में एक द्वीप पर सुंदर एक्वेरियम कैफे बना है। 'सातताल' आपस में जुड़ी सात प्राकृतिक मीठे पानी की झीलों का समूह है जो पक्षी प्रेमियों (Birdwatching) का स्वर्ग है। 'नौकुचियाताल' नौ कोनों वाली 40 मीटर गहरी झील है जहां कयाकिंग और पैराग्लाइडिंग कराई जाती है।
नैनीताल का माल रोड शाम को पैदल यात्रियों के लिए एक उत्सव बन जाता है। यहां की हाथ से तराशी गई खुशबूदार 'डिज़ाइनर मोमबत्तियां' (Carved Candles) विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। खानपान में कुमाऊंनी शैली की 'भट की चुड़कानी' (काले सोयाबीन की ग्रेवी), 'आलू के गुटके', बाल मिठाई (मावे पर चीनी के सफेद दानों वाली मिठाई), और सिंगौड़ी का स्वाद स्थानीय संस्कृति से जोड़ता है।
काठगोदाम अंतिम रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ से सीधी ट्रेनों से जुड़ा है। काठगोदाम से नैनीताल की दूरी 34 किमी है जहां से शेयर्ड टैक्सी (लगभग ₹150) या निजी कैब द्वारा 1 घंटे में पहुंचा जा सकता है।
रोपवे माल रोड के पास से प्रतिदिन सुबह 10:00 से शाम 4:30 बजे तक चलता है। टिकट लगभग ₹300-350 (आना-जाना) होती है और ऊपर रुकने के लिए 1 घंटे का समय दिया जाता है।
नैनी झील में पेडल बोट (₹150-200 प्रति घंटा) और पारंपरिक चप्पू वाली नाव (Row Boat - ₹300-400 पूरे चक्कर के लिए) नगरपालिका परिषद द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध होती हैं।
मंदिरों, घाटों, किलों और ऐतिहासिक नगरों की विस्तृत जानकारी के लिए राज्य पोर्टल पर जाएं।
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