सेल्यूलर जेल राष्ट्रीय स्मारक, पोर्ट ब्लेयर
1906 में निर्मित कुख्यात 'कालापानी', जहाँ वीर सावरकर, बटुकेश्वर दत्त सहित सैकड़ों राष्ट्रभक्तों ने अमानवीय यातनाएं सहीं, अमर ज्योति एवं लाइट एंड साउंड शो।
बंगाल की खाड़ी में 572 पन्ना-हरे द्वीपों का समूह, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों की तपोभूमि सेल्यूलर जेल (कालापानी), टाइम मैगज़ीन द्वारा एशिया का सर्वश्रेष्ठ घोषित राधानगर बीच और भारत का एकमात्र सक्रिय बैरन द्वीप ज्वालामुखी अंडमान को रोमांच और राष्ट्रभक्ति का तीर्थ बनाते हैं।
1906 में निर्मित कुख्यात 'कालापानी', जहाँ वीर सावरकर, बटुकेश्वर दत्त सहित सैकड़ों राष्ट्रभक्तों ने अमानवीय यातनाएं सहीं, अमर ज्योति एवं लाइट एंड साउंड शो।
टाइम मैगज़ीन द्वारा 'एशिया का सर्वश्रेष्ठ समुद्र तट', सफेद महीन रेत, फिरोजी-नीला पारदर्शी पानी, हरे-भरे महुआ के वन और मनमोहक सूर्यास्त।
मैंग्रोव खाड़ियों में स्पीडबोट की रोमांचक यात्रा, लाखों वर्षों में बनी चूना पत्थर की स्टैलेक्टाइट गुफाएं और भारत का एकमात्र जीवित मड वोल्केनो।
ब्रिटिश प्रशासनिक राजधानी के खंडहर, जहाँ 30 दिसंबर 1943 को नेताजी ने पहली बार तिरंगा फहराया था, हिरण और मोरों से भरा शांत द्वीप।
अंडमान का सब्जी का कटोरा, जीवित प्रवाल भित्तियों वाला भरतपुर बीच, लक्ष्मणपुर सूर्यास्त बीच और समुद्र की लहरों से तराशा गया 'हावड़ा ब्रिज' नेचुरल रॉक आर्क।
पोर्ट ब्लेयर से 135 किमी उत्तर-पूर्व में समुद्र के बीच स्थित निर्जन ज्वालामुखी द्वीप, जहाँ 1991 से लावा उद्गार जारी है, क्रूज़ से विहंगम दर्शन।
अंडमान का नाम रामायण के 'हनुमान' (मलय भाषा में हांडूमान) से व्युत्पन्न माना जाता है। 11वीं सदी में राजेंद्र चोल ने इसे अपनी नौसेना का आधार बनाया। 1858 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने यहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को आजीवन कारावास देने हेतु जेल बनाई, जो 1906 में 7 पंखों वाली 'सेल्यूलर जेल' में तब्दील हुई। 30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में पहली बार आजाद भारत का तिरंगा फहराकर द्वीपों का नाम 'शहीद' और 'स्वराज' द्वीप रखा था।
अंडमान और निकोबार 572 द्वीपों, टापुओं और चट्टानों की शृंखला है, जो म्यांमार के अराकान योमा पर्वतमाला के जलमग्न विस्तार हैं। अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह को '10 डिग्री चैनल' (Ten Degree Channel) 150 किमी चौड़े समुद्र से अलग करता है। ग्रेट निकोबार का 'इंदिरा पॉइंट' (6°45' N) भारत का सबसे दक्षिणी भौगोलिक बिंदु है। यहाँ जारवा, ओंगे, सेंटिनलीज और शोम्पेन जैसी पुरापाषाण काल की मूल जनजातियां सुरक्षित हैं।
अंडमान को 'लघु भारत' (Mini India) कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश के सभी राज्यों के लोग (तमिल, बंगाली, तेलुगु, पंजाबी, मलयाली) बिना किसी जाति या सांप्रदायिक भेद के हिंदी भाषा के माध्यम से सौहार्दपूर्वक रहते हैं। सी-फूड यहाँ का प्रमुख आहार है—ताजी तली हुई मछली, केकड़ा, झींगा करी और नारियल का पानी। द्वीपीय हस्तशिल्प में नारियल के खोल के बर्तन, सीपी (शंख) और केन की वस्तुएं प्रमुख हैं।
अंडमान भ्रमण के लिए अक्टूबर से मई का समय समुद्र के शांत होने और वाटर स्पोर्ट्स (स्कूबा डाइविंग, सी-वॉक, स्नोर्कलिंग) के लिए सर्वोत्तम है। पोर्ट ब्लेयर से हैवलॉक और नील द्वीप के लिए मकरूज़, ग्रीन ओशन जैसी निजी एसी कैटामारन फेरी पहले से ऑनलाइन बुक कर लें। मूल जनजातीय क्षेत्रों (विशेषकर जारवा आरक्षित क्षेत्र) में फोटोग्राफी और संपर्क करना कानूनी अपराध है।
सेल्यूलर जेल चारों ओर से अगम्य, गहरे समुद्र से घिरी थी जहाँ से भागना असंभव था। 'काल' का अर्थ मृत्यु भी होता है, अतः जो कैदी यहाँ भेजा जाता था, उसके जीवन का अंत इसी एकांत कारावास में निश्चित माना जाता था। यहाँ वीर सावरकर ने 10 वर्ष तक घोर यातनाएं सहते हुए जेल की दीवारों पर कीलों से महाकाव्य लिखा था।
उत्तरी अंडमान के डिगलीपुर में स्थित रॉस और स्मिथ दो द्वीप हैं जो 50 मीटर चौड़े प्राकृतिक सफेद रेत के टीले (Sandbar) से आपस में जुड़े हैं। कम ज्वार (Low Tide) के समय रेत का यह मार्ग पानी से बाहर निकल आता है और दोनों द्वीपों के बीच पैदल चला जा सकता है।
उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली सेंटिनलीज जनजाति विश्व के अंतिम असंपर्कित (Uncontacted) मानव समुदायों में से एक है। वे 50,000 वर्षों से बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग पाषाण युग की जीवनशैली में रहते हैं। भारत सरकार ने उनके संरक्षण हेतु द्वीप के 5 किमी दायरे में किसी भी व्यक्ति के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है।
इंदिरा पॉइंट भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है। 2004 की सुनामी में यहाँ का ऐतिहासिक लाइटहाउस आंशिक रूप से जलमग्न हो गया था। यह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप से मात्र 150 किमी दूर है।