तवांग बौद्ध मठ (गालदेन नामग्याल ल्हात्से), तवांग
1680-81 ई. में स्थापित ल्हासा (तिब्बत) के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध महामठ, 10,000 फीट की ऊंचाई, 28 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा एवं 400 वर्ष प्राचीन पांडुलिपियां।
भारत की सीमा पर सूर्य की पहली किरण का आलिंगन करने वाले डोंग गांव, 13,700 फीट पर बर्फ से ढके सेला दर्रे, भारत के सबसे बड़े तवांग बौद्ध महामठ, जीरो घाटी के अपातानी जनजातीय पारिस्थितिकी तंत्र और नामदाफा के सघन वर्षावनों से दीप्तिमान अरुणाचल प्रदेश भारत का पूर्वोत्तर प्रहरी है।
1680-81 ई. में स्थापित ल्हासा (तिब्बत) के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध महामठ, 10,000 फीट की ऊंचाई, 28 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा एवं 400 वर्ष प्राचीन पांडुलिपियां।
13,700 फीट (4,170 मी) की ऊंचाई पर स्थित रणनीतिक हिमालयी दर्रा, वर्ष भर बर्फ से आच्छादित स्वर्ग समान सेला झील और 1962 के युद्ध नायक जसवंत सिंह का स्मारक।
यूनेस्को टेंटेटिव लिस्ट, अपातानी समुदाय की अनूठी धान-सह-मत्स्य पालन प्रणाली, चेहरे पर बांस के नोज़-प्लग (यापिंग हुलो) और टैटू, वार्षिक जीरो म्यूजिक फेस्टिवल।
भारत का तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान, विश्व का एकमात्र अभयारण्य जहाँ मार्जार कुल की 4 बड़ी प्रजातियां (बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और क्लाउडेड लेपर्ड) एक साथ रहती हैं।
12,000 फीट की ऊंचाई पर 1950 के भूकंप में जलमग्न हुए देवदार के ठूंठों वाली सुरम्य झील, जिसे 'कोयला' फिल्म की शूटिंग के बाद माधुरी झील कहा जाने लगा।
भारत-चीन-म्यांमार ट्राई-जंक्शन के निकट 1,240 मीटर पर स्थित वह स्थान जहाँ भारत में सबसे पहले प्रातः 4:00 बजे सूर्य की किरणें धरा को चूमती हैं।
अरुणाचल प्रदेश का प्राचीन उल्लेख कालिका पुराण और महाभारत में मिलता है। लोहित नदी पर स्थित परशुराम कुंड वह स्थान है जहाँ भगवान परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी धोकर मातृ-हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। भालुकपोंग बाणासुर की राजधानी माना जाता है। 1680 में मेराक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने तवांग मठ की स्थापना की। छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो का जन्म 1683 में तवांग में हुआ था। 1914 में शिमला सम्मेलन के दौरान सर हेनरी मैकमोहन ने भारत और तिब्बत के बीच 'मैकमोहन रेखा' निर्धारित की। 20 फरवरी 1987 को अरुणाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बना।
अरुणाचल प्रदेश भारत का उत्तर-पूर्वी प्रहरी है जिसकी 1,129 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा तिब्बत (चीन) से लगती है। यह पूर्वी हिमालय की विस्मयकारी पर्वतमालाओं में स्थित है जहाँ कांगतो (7,060 मी) और गोरीचेन (6,488 मी) जैसे गगनचुंबी हिमशिखर हैं। तिब्बत से बहकर आने वाली त्सांगपो अरुणाचल में 'सियांग' और आगे चलकर असम में 'ब्रह्मपुत्र' कहलाती है। राज्य का 80% भूभाग घने अल्पाइन और उपोष्णकटिबंधीय वनों से आच्छादित है।
अरुणाचल प्रदेश में 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां निवास करती हैं, जिनमें मोनपा, अपातानी, न्यिशी, आदि, मिश्मी, तागिन और खाम्पती प्रमुख हैं। अधिकांश जनजातियां प्रकृति-पूजक हैं और सूर्य-चंद्रमा (डोनी-पोलो) की आराधना करती हैं। तवांग का तोर्ग्या महोत्सव, आदि जनजाति का सोलुंग, और न्यिशी का न्योकुम प्रमुख सांस्कृतिक पर्व हैं। थुकपा, मोमोज, अपोंग (चावल की पारंपरिक बीयर), लूकटर (बीफ/पोर्क और मिर्च) और बांस के कोपल यहाँ के लोकप्रिय आहार हैं।
अरुणाचल प्रदेश भ्रमण के लिए भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (ILP) और विदेशी पर्यटकों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) लेना अनिवार्य है (ऑनलाइन arunachalilp.com पर उपलब्ध)। तवांग की यात्रा के लिए तेजपुर/गुवाहाटी से भालुकपोंग, बोमडिला और सेला दर्रे से होकर जाने वाला 2 दिवसीय सड़क मार्ग सबसे लोकप्रिय है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण 4x4 वाहन या स्नो-चेन की आवश्यकता पड़ सकती है।
तवांग मठ समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एशिया का दूसरा सबसे बड़ा और भारत का सबसे बड़ा तिब्बती बौद्ध मठ है। यह गेलुगपा (येलो हैट) संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है जिसमें 500 से अधिक बौद्ध भिक्षु निवास करते हैं और यहाँ 17वीं सदी की स्वर्ण अक्षरों वाली कांग्यूर पांडुलिपियां सुरक्षित हैं।
जीरो घाटी की अपातानी महिलाएं पारंपरिक रूप से अपनी नाक के दोनों ओर बड़े लकड़ी के छल्ले (यापिंग हुलो / Nose Plugs) पहनती थीं और चेहरे पर माथे से ठोड़ी तक नीली रेखाओं के टैटू बनवाती थीं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, अपनी अप्रतिम सुंदरता के कारण अन्य जनजातियों द्वारा अपहरण से बचने के लिए यह परंपरा शुरू हुई थी, जिसे अब युवा पीढ़ी ने बंद कर दिया है।
लोहित जिले में लोहित नदी के तट पर स्थित परशुराम कुंड में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि पिता की आज्ञा से माता का वध करने के बाद परशुराम जी के हाथ से चिपका परशु (कुल्हाड़ी) इसी कुंड में स्नान करने के बाद छूटा था।
भारत के पूर्वी छोर पर अंजाव जिले के डोंग गांव में देश में सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती हैं। गर्मियों में यहाँ प्रातः 4:00 से 4:15 बजे के बीच सूर्योदय हो जाता है, जब देश के पश्चिमी भाग (गुजरात) में रात के 2 घंटे शेष होते हैं।