काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, गोलाघाट/नागांव
यूनेस्को विश्व धरोहर, विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले भारतीय गैंडों (One-horned Rhinos) का आवास, हाथी सफारी, दलदली हिरण और बाघ अभयारण्य।
विशाल ब्रह्मपुत्र की कलकल जलधारा, नीलाचल पर्वत पर विराजमान मां कामाख्या का तांत्रिक महापीठ, काजीरंगा के सघन तृणभूमि में विचरते एक सींग वाले गैंडे, विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली और 600 वर्षों तक अजेय रहे अहोम साम्राज्य की वीरभूमि असम पूर्वोत्तर भारत का महाद्वार है।
यूनेस्को विश्व धरोहर, विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले भारतीय गैंडों (One-horned Rhinos) का आवास, हाथी सफारी, दलदली हिरण और बाघ अभयारण्य।
51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च योनिपीठ, अंबूबाची मेला (पृथ्वी का रजस्वला पर्व), तांत्रिक साधना का वैश्विक केंद्र और 10 महाविद्या मंदिर।
ब्रह्मपुत्र के मध्य 352 वर्ग किमी में फैला द्वीप, 15वीं सदी के श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित नव-वैष्णव सत्र (कमलाबारी, औनियाटी) और मुखौटा कला।
600 वर्षों की अहोम राजधानी, 1734 ई. का रंग घर (एशिया का पहला एम्फीथिएटर), तलातल घर (सैन्य सुरंग महल) और शिवदौल मंदिर।
भूटान सीमा पर स्थित यूनेस्को बायोस्फीयर, दुर्लभ पिग्मी हॉग (विश्व का सबसे छोटा जंगली सुअर), गोल्डन लंगूर और जंगली जल भैंसे।
असम का एकमात्र पर्वतीय नगर (680 मी), हाफलोंग झील, बोरैल पर्वतमाला और जतिंगा गांव (प्रवासी पक्षी परिघटना)।
प्राचीन काल में असम को 'प्राग्ज्योतिषपुर' (ज्योतिष का नगर) और 'कामरूप' कहा जाता था। महाभारत में नरकासुर और बाणासुर का उल्लेख इसी भूमि से है। 1228 ई. में सुकाफा द्वारा स्थापित अहोम राजवंश ने असम पर 1826 तक (लगभग 600 वर्ष) अनवरत शासन किया। 1671 के ऐतिहासिक 'सराईघाट के युद्ध' में अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर मुगल साम्राज्य की विशाल नौसेना को परास्त कर दिया। 1826 की यांडाबू संधि के बाद असम ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बना।
असम का मुख्य भौगोलिक आधार ब्रह्मपुत्र नदी की 80-100 किमी चौड़ी और 700 किमी लंबी घाटी है। तिब्बत से यारलुंग त्सांगपो के रूप में बहकर आने वाली ब्रह्मपुत्र असम में विशाल जलराशि लेकर प्रवेश करती है। गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के मध्य स्थित उमानंद (पीकॉक आइलैंड) विश्व का सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप है, जबकि जोरहाट का माजुली विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है। असम के घने वनों में विश्वप्रसिद्ध काजीरंगा और मानस बायोस्फीयर स्थित हैं।
असम का प्राण 'बिहू' है—रोंगाली बिहू (वसंत ऋतु, नया साल), कोंगाली बिहू (काति, फसल सुरक्षा) और भोगाली बिहू (माघ, अन्नपूर्णा उत्सव)। बिहू नृत्य में पेपा (भैंस के सींग का बाजा) और ढोल की धुन पर युवा थिरकते हैं। असमिया मुगा सिल्क (सुनहरा रेशम जो केवल असम में पाया जाता है), एरी और पाट सिल्क को वैश्विक जीआई टैग प्राप्त है। जापी (पारंपरिक बांस की टोपी) और गमोसा (सम्मान का वस्त्र) अस्मिता के प्रतीक हैं। खार, मासोर टेंगा (खट्टी मछली करी), और पिठा यहाँ के मुख्य स्वाद हैं।
असम भ्रमण के लिए नवंबर से अप्रैल का समय सबसे सुखद है। काजीरंगा और मानस नेशनल पार्क प्रतिवर्ष 1 मई से 31 अक्टूबर तक मानसून के कारण पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं, अतः वन्यजीव सफारी की योजना नवंबर से अप्रैल के बीच ही बनाएं। गुवाहाटी से माजुली के लिए जोरहाट (नीमती घाट) से नियमित नौकाएं (फेरी) चलती हैं।
प्रतिवर्ष आषाढ़ मास (जून) में आयोजित होने वाले अंबूबाची मेले के दौरान माना जाता है कि मां कामाख्या (धरती माता) तीन दिनों के लिए रजस्वला होती हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और चौथे दिन ब्रह्मपुत्र का जल रक्ताभ होने पर भक्तों को 'अंगोदक' और 'रक्तवस्त्र' प्रसाद रूप में दिया जाता है।
1905 में लॉर्ड कर्जन की पत्नी मैरी कर्जन की पहल पर काजीरंगा को केवल 12 गैंडों के साथ आरक्षित वन बनाया गया था। कड़े शिकार-रोधी कानूनों और वनकर्मियों की सजगता से आज यहाँ 2,600 से अधिक एक सींग वाले गैंडे सुरक्षित हैं।
मुगा रेशम केवल असम के ब्रह्मपुत्र कछार में पाए जाने वाले 'एन्थेरिया असामा' रेशमकीट से प्राप्त होता है। यह प्राकृतिक रूप से चमकदार सुनहरे रंग का होता है। इसकी विशेषता है कि प्रत्येक धुलाई के साथ इसकी चमक बढ़ती है और यह 100 वर्ष से अधिक समय तक सुरक्षित रहता है।
1671 में अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर मुगल सेनापति रामसिंह को नौसैनिक युद्ध में निर्णायक रूप से पराजित किया था। गंभीर बीमारी के बावजूद लाचित ने कहा था- 'देश से बड़ा कोई नहीं' और मुगलों को असम में कभी पैर नहीं पसारने दिया।