महाबोधि मंदिर एवं पवित्र बोधि वृक्ष, बोधगया
यूनेस्को विश्व धरोहर जहाँ 531 ई.पू. में राजकुमार सिद्धार्थ को संबोधि (ज्ञान) प्राप्त हुआ, 50 मीटर ऊंचा पिरामिडीय मंदिर, वज्रासन एवं मुचलिंद सरोवर।
भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे कैवल्य ज्ञान, भगवान महावीर का निर्वाण, सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य का अखंड मगध साम्राज्य और विश्व का प्राचीनतम नालंदा विश्वविद्यालय बिहार को ज्ञान का शाश्वत पालना बनाते हैं।
यूनेस्को विश्व धरोहर जहाँ 531 ई.पू. में राजकुमार सिद्धार्थ को संबोधि (ज्ञान) प्राप्त हुआ, 50 मीटर ऊंचा पिरामिडीय मंदिर, वज्रासन एवं मुचलिंद सरोवर।
5वीं सदी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त द्वारा स्थापित विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय, जहाँ 10,000 छात्र और 2,000 आचार्य पढ़ते थे, धर्मगंज पुस्तकालय।
मगध की प्रथम राजधानी गिरिव्रज, गृद्धकूट पर्वत पर जापानी शांति स्तूप, ग्लास स्काईवॉक, वेणुवन और सप्तपर्णी गुफा (प्रथम बौद्ध संगीति)।
सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आजीवक संप्रदाय के लिए निर्मित भारत की प्राचीनतम चट्टान-तराशी गुफाएं, दर्पण जैसी पॉलिश।
104 फीट ऊंचा विश्व का सबसे ऊंचा प्राचीन बौद्ध स्तूप (इंडोनेशिया के बोरोबुदुर से भी 1 फीट ऊंचा), जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना भिक्षापात्र छोड़ा था।
सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की पावन जन्मस्थली, पंच तख्तों में से एक, गंगा तट पर स्थित भव्य श्वेत संगमरमरी गुरुद्वारा।
बिहार का इतिहास वस्तुतः प्राचीन भारत का इतिहास है। मगध महाजनपद के हर्यक (बिंबिसार, अजातशत्रु), नंद और मौर्य वंश (चंद्रगुप्त, चाणक्य और चक्रवर्ती अशोक) ने पाटलिपुत्र को अखंड भारत की राजधानी बनाया। गुप्त काल में आर्यभट्ट ने शून्य और दशमलव प्रणाली का आविष्कार यहीं किया। 12वीं सदी के अंत में बख्तियार खिलजी ने नालंदा और विक्रमशिला को जलाया। 16वीं सदी में शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड) और रुपया मुद्रा का सूत्रपात किया। 1917 में महात्मा गांधी ने चंपारण से भारत में सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग किया।
बिहार को पवित्र गंगा नदी दो प्राकृतिक भागों—उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार—में विभाजित करती है। उत्तर बिहार हिमालयी नदियों (कोसी, गंडक, बागमती) के समतल मैदानों से युक्त है, जबकि दक्षिण बिहार में छोटानागपुर पठार की तलहटी और विंध्य पहाड़ियाँ (कैमूर व राजगीर की पहाड़ियाँ) स्थित हैं। पश्चिम चंपारण में स्थित वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान बिहार का एकमात्र टाइगर रिज़र्व है जो नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से सटा हुआ है।
लोक आस्था का महापर्व 'छठ पूजा' बिहार की आत्मा है, जिसमें अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मिथिला की 'मधुबनी पेंटिंग' (GI टैग) और मंजूषा कला ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है। बिस्मिल्लाह खां की शहनाई और भिखारी ठाकुर का विदेशिया लोकनाट्य बिहार के सांस्कृतिक गौरव हैं। लिट्टी-चोखा, सत्तू परांठा, मखाना की खीर, गया का तिलकुट और सिलाव का खाजा (GI टैग) यहाँ के पारंपरिक स्वाद हैं।
बिहार भ्रमण का सबसे अनुकूल समय अक्टूबर से मार्च है। कार्तिक मास में आयोजित होने वाला चार दिवसीय छठ महापर्व गंगा घाटों पर लोक आस्था का अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है। पटना, गया और दरभंगा हवाई मार्ग से जुड़े हैं। बौद्ध सर्किट (बोधगया-राजगीर-नालंदा-वैशाली) के लिए सुव्यवस्थित 4-5 दिवसीय परिपथ सबसे लोकप्रिय है।
2016 में नालंदा महाविहार के पुरातात्विक स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया। इसके खंडहरों में बौद्ध स्तूप, चैत्य, विहार, भिक्षु कक्ष और प्राचीन जल निकासी व्यवस्था संरक्षित है।
धार्मिक मान्यतानुसार फल्गु नदी के तट पर स्थित विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं। आश्विन मास के पितृपक्ष में यहाँ पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में वैशाली के वज्जि संघ (लिच्छवी गणराज्य) में राजा का चयन जनता के प्रतिनिधियों की संसद (संथागार) द्वारा लोकतांत्रिक मतदान से होता था, जो विश्व का सबसे पहला ज्ञात गणतंत्र है।
एक विशाल चौकोर कृत्रिम झील के मध्य 1545 ई. में निर्मित शेरशाह सूरी का मकबरा इंडो-इस्लामिक स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है। 122 फीट ऊंचा यह अष्टकोणीय मकबरा पानी में तैरता हुआ प्रतीत होता है।