कैलाश मंदिर (एलोरा गुफा 16), महाराष्ट्र
राष्ट्रकूट काल में पूरी पहाड़ी को ऊपर से नीचे 100 फीट गहरा काटकर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म पाषाण मंदिर।
सह्याद्रि की बेसाल्ट चट्टानों में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा साधना हेतु खोदी गई अजंता-एलोरा की गुहाएं, 30,000 वर्ष पुराने भीमबेटका के आदिमानव शैलचित्र, बराबर की मौर्यकालीन पॉलिशदार गुफाएं और मेघालय का विशाल भूमिगत गुहा-तंत्र भारत के भूवैज्ञानिक व आध्यात्मिक गौरव हैं।
राष्ट्रकूट काल में पूरी पहाड़ी को ऊपर से नीचे 100 फीट गहरा काटकर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म पाषाण मंदिर।
वाघोरा नदी की घाटी में दूसरी सदी ई.पू. से निर्मित 30 शैलकृत बौद्ध गुफाएं, पद्मपाणि और वज्रपाणि के अमर प्राकृतिक रंगीन चित्र।
विंध्य पर्वतमाला में 750 पाषाण आश्रय, पुरापाषाण काल के मानव जीवन, शिकार और नृत्य को दर्शाते खनिज रंगों के आदिम चित्र।
6वीं सदी में बादामी के लाल बलुआ पत्थर पर तराशी गई 4 गुफाएं, 18 भुजाओं वाले नटराज शिव और भगवान विष्णु का वराह अवतार।
सम्राट अशोक द्वारा 322 ई.पू. में आजीवक संप्रदाय के लिए निर्मित भारत की सबसे पुरानी शैलकृत गुफाएं, कांच जैसी चिकनी पॉलिश।
मेघालय के चूना पत्थर का भूमिगत तंत्र, 31 किमी लंबी भारत की सबसे बड़ी गुफा और आश्चर्यजनक स्टैलेक्टाइट संरचनाएं।
भारतीय शैलकृत वास्तुकला विश्व में अनूठी है क्योंकि इसमें किसी इमारत का निर्माण पत्थरों को जोड़कर नहीं, बल्कि पूरी जीवित चट्टान को भीतर से खोखला कर खंभे, मेहराब, मूर्तियां और गर्भगृह तराश कर किया गया। अजंता में बौद्ध भिक्षुओं ने व्यापारिक मार्गों से दूर शांत घाटियों में वर्षावास (विहार) और प्रार्थना कक्ष (चैत्य) बनाए। चट्टानों की दीवारों पर प्लास्टर चढ़ाकर वनस्पतियों और खनिजों से ऐसे रंग तैयार किए गए जो 2,000 वर्ष बाद भी सजीव प्रतीत होते हैं।
शैलकृत गुफाओं के अतिरिक्त भारत में चूना पत्थर के पानी में घुलने (Karst Topography) से बनी विस्मयकारी प्राकृतिक गुफाएं हैं। आंध्र प्रदेश की बेलम गुफाएं और बोरा गुफाएं लाखों वर्षों के भूगर्भीय जल-प्रवाह से बनी हैं। मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में क्रेम लियात प्राह गुहा-तंत्र 31 किलोमीटर लंबा है, जहाँ आज भी विश्व भर के गुहा-वैज्ञानिक (Speleologists) नई शाखाओं की खोज कर रहे हैं।
प्राचीन गुफाओं में भित्ति चित्रों पर कैमरे का फ्लैश जलाना सख्त वर्जित है क्योंकि तीव्र प्रकाश प्राचीन रंगों को नुकसान पहुँचाता है। प्राकृतिक चूना पत्थर की गुफाओं में जाने से पहले टॉर्च, रबर ग्रिप वाले जूते और स्थानीय गाइड साथ रखें। गुफाओं की सतह गीली और फिसलन भरी होती है, अतः संतुलन बनाए रखें।
अजंता की सभी 30 गुफाएं केवल बौद्ध धर्म (हीनयान व महायान) से संबंधित हैं और वे मुख्यतः अपने प्राचीन भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके विपरीत एलोरा में 34 गुफाएं तीन धर्मों—बौद्ध (1-12), हिंदू (13-29), और जैन (30-34)—का संगम हैं और वे उत्कृष्ट पाषाण मूर्तिकला व कैलाश मंदिर के लिए जानी जाती हैं।
बिहार के गया-जहानाबाद में स्थित बराबर गुफाओं की ग्रेनाइट दीवारों को मौर्य काल में इतनी सटीकता से चिकना किया गया था कि वे आज भी दर्पण की तरह चमकती हैं। इसे 'मौर्यकालीन पॉलिश' (Mauryan Polish) कहा जाता है। इसके भीतर एक सूक्ष्म फुसफुसाहट भी कई सेकंड तक गूंजती है।
चूना पत्थर की प्राकृतिक गुफाओं की छतों से जब कैल्शियम बाइकार्बोनेट युक्त जल बूंद-बूंद टपकता है, तो छत से लटकने वाले नुकीले पाषाण स्तंभों को 'स्टैलेक्टाइट' और फर्श से ऊपर उठने वाले स्तंभों को 'स्टैलेग्माइट' कहा जाता है। जब ये दोनों मिल जाते हैं, तो पूर्ण पाषाण स्तंभ बन जाता है।