नेकचंद का रॉक गार्डन, सेक्टर 1
घरेलू कचरे, टूटी चूड़ियों, सिरेमिक टाइलों और बिजली के तारों से 40 एकड़ में निर्मित विश्वविख्यात मूर्तिकला उद्यान, 5,000+ कलाकृतियां।
प्रसिद्ध फ्रांसीसी-स्विस वास्तुकार ली कोर्बुज़िए द्वारा मानव शरीर की संरचना पर सुनियोजित, शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा, नेकचंद के विस्मयकारी रॉक गार्डन और यूनेस्को कैपिटल कॉम्प्लेक्स से सुसज्जित चंडीगढ़ भारत का सर्वाधिक हरित और आधुनिक शहर है।
घरेलू कचरे, टूटी चूड़ियों, सिरेमिक टाइलों और बिजली के तारों से 40 एकड़ में निर्मित विश्वविख्यात मूर्तिकला उद्यान, 5,000+ कलाकृतियां।
ली कोर्बुज़िए द्वारा कंक्रीट में ढली पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय, विधानसभा सचिवालय और शांति का प्रतीक 85 फीट ऊंचा 'ओपन हैंड मॉन्यूमेंट'।
शिवालिक की तलहटी में 3 वर्ग किमी में फैली कृत्रिम झील, 2 किमी लंबा जॉगर्स ट्रैक, रोइंग व बोटिंग क्लब और सर्दियों में साइबेरियन बत्तखों का बसेरा।
एशिया का सबसे बड़ा गुलाब उद्यान, 30 एकड़ में 1,600 से अधिक दुर्लभ गुलाबों की किस्में, 50,000 गुलाब के पौधे और वार्षिक गुलाब महोत्सव।
ली कोर्बुज़िए द्वारा निर्मित चंडीगढ़ का आधिकारिक प्रतीक—'देने के लिए खुला हाथ, पाने के लिए खुला हाथ', जो विश्व शांति और बंधुत्व का संदेश देता है।
1947 विभाजन के बाद लाहौर संग्रहालय से प्राप्त गांधार बौद्ध मूर्तियां, पहाड़ी और राजस्थानी मिनिएचर पेंटिंग्स और सिक्कों का दुर्लभ संग्रह।
1947 में भारत के विभाजन में लाहौर के पाकिस्तान चले जाने के बाद स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंजाब के लिए एक नए, आधुनिक और भविष्यदर्शी शहर की कल्पना की। प्रसिद्ध स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ली कोर्बुज़िए ने पियरे जीनरेट, मैक्सवेल फ्राई और जेन ड्रू के साथ मिलकर 1950 के दशक में इसका मास्टर प्लान तैयार किया। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन पर इसे पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी और केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
चंडीगढ़ शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में दो मौसमी बरसाती नदियों—सुखना चो (पूर्व में) और पटियाली की राव (पश्चिम में)—के मध्य समतल पठार पर स्थित है। शहर का ग्रिड-आयरन प्लान (Grid-iron Plan) एक मानव शरीर के रूप में कल्पित है: सेक्टर 1 (कैपिटल कॉम्प्लेक्स) शहर का 'सिर', सेक्टर 17 (सिटी सेंटर) 'हृदय', सेक्टर 10/11 का एजुकेशन हब 'बुद्धि', और औद्योगिक क्षेत्र 'हाथ-पैर' हैं। शहर में कोई सेक्टर 13 नहीं है क्योंकि 13 अंक को पश्चिमी मान्यताओं में अशुभ माना जाता था।
चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की समृद्ध ग्रामीण ऊर्जा और आधुनिक शहरी अभिजात्यता का सुंदर मिश्रण है। इसे 'द सिटी ब्यूटीफुल' कहा जाता है। शहर का 'गेड़ी रूट' (सेक्टर 8, 9, 10, 11) युवाओं के सामाजिक मिलन का केंद्र है। सेक्टर 17 का खुला प्लाजा खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दिल है। खानपान में पंजाबी परांठे, कुल्चे, बटर चिकन, लस्सी और आधुनिक कैफे संस्कृति पूरे शहर में जीवंत है।
चंडीगढ़ भ्रमण के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सुखद है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाला 3 दिवसीय 'रोज फेस्टिवल' अत्यंत मनोहारी होता है। शहर में साइकिल ट्रैक का 180 किमी लंबा नेटवर्क है और पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम से साइकिल किराए पर लेकर सेक्टरों का भ्रमण सबसे पर्यावरण-अनुकूल अनुभव है।
नेकचंद सैनी (एक सरकारी सड़क निरीक्षक) ने 1957 में सुखना झील के पास वन क्षेत्र में चुपके से शहर के विध्वंस से बचे मलबे, टूटी क्रॉकरी, कांच की चूड़ियों और पत्थरों को इकट्ठा कर कलाकृतियां बनाना शुरू किया। 18 वर्ष तक यह पूरी दुनिया से छिपा रहा। 1975 में प्रशासन ने इसे खोजा और नष्ट करने के बजाय एक सार्वजनिक विरासत पार्क का रूप दे दिया।
चंडीगढ़ के मुख्य योजनाकार ली कोर्बुज़िए यूरोपीय थे। पश्चिमी संस्कृति में अंक 13 को 'ट्रिस्काइडेकाफोबिया' (13 का अंधविश्वास) के कारण अशुभ माना जाता है, इसलिए उन्होंने सेक्टर 12 के बाद सीधे सेक्टर 14 का नामकरण किया।
चंडीगढ़ का ट्रैफिक सिस्टम 7 प्रकार की सड़कों (V1 से V7) में विभाजित है: V1 (महानगरों को जोड़ने वाले हाईवे), V2 (शहर की मुख्य सड़कें), V3 (सेक्टरों को घेरने वाली तेज रफ्तार सड़कें), V4 (सेक्टर की मुख्य बाजार सड़कें), V5 (आवासीय सड़कें), V6 (घरों तक जाने वाले रास्ते), और V7 (पैदल व साइकिल ट्रैक)। इस योजना से शहर में ट्रैफिक जाम न्यूनतम रहता है।
85 फीट ऊंचा और 50 टन वजनी धातु का यह खुला हाथ हवा की दिशा में 360 डिग्री घूमता है। ली कोर्बुज़िए के अनुसार, यह शांति और सुलह का प्रतीक है—'देने के लिए खुला, लेने के लिए खुला' (Open to give, open to receive)।