बासिलिका ऑफ बॉम जीसस एवं से कैथेड्रल, ओल्ड गोवा
1605 ई. का यूनेस्को विश्व धरोहर कैथोलिक चर्च जहाँ सेंट फ्रांसिस जेवियर का पवित्र पार्थिव शरीर सुरक्षित है, एवं एशिया का सबसे बड़ा से कैथेड्रल।
अरब सागर की सुनहरी रेत, ताड़ के झूमते वृक्षों, मांडवी और जुआरी नदियों, 450 वर्षों की पुर्तगाली स्थापत्य विरासत और पश्चिमी घाट के दूधिया दूधसागर प्रपात से सुसज्जित गोवा भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय तटीय राज्य है।
1605 ई. का यूनेस्को विश्व धरोहर कैथोलिक चर्च जहाँ सेंट फ्रांसिस जेवियर का पवित्र पार्थिव शरीर सुरक्षित है, एवं एशिया का सबसे बड़ा से कैथेड्रल।
मांडवी नदी पर 310 मीटर ऊंचाई से 4 स्तरों में गिरता भारत का 5वां सबसे ऊंचा जलप्रपात, जिसके मध्य से गुजरता रेलवे ट्रैक एक अजूबा है।
1612 ई. में पुर्तगालियों द्वारा डचों से रक्षा हेतु निर्मित विशाल तटीय दुर्ग, 79 गन बैटरियां, 4 मंजिला लाइटहाउस और 23 लाख गैलन का मीठे पानी का कुंड।
दक्षिण गोवा के शांत अर्धचंद्राकार तट, डॉल्फ़िन क्रूज़, रंग-बिरंगे काष्ठ कॉटेज, कयाकिंग और भीड़-भाड़ से दूर एकांत विश्राम।
यूनेस्को हेरिटेज जोन, 18वीं-19वीं सदी की पुर्तगाली शैली की चमकीली पीली, नीली और लाल रंग की औपनिवेशिक हवेलियां और संकरी गलियां।
450 वर्ष प्राचीन भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर, 7 मंजिला दीपस्तंभ (दीपमाल), पानी का तालाब और गोमंतक हिंदू वास्तुकला।
गोवा का इतिहास कदंब, विजयनगर और बीजापुर के आदिल शाही सुल्तानों के अधीन रहा। 1510 ई. में पुर्तगाली गवर्नर अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने इसे जीतकर पुर्तगाली ईस्ट इंडीज की राजधानी बनाया। 450 वर्षों के पुर्तगाली शासन के दौरान यहाँ पश्चिमी और भारतीय संस्कृतियों का अनूठा समन्वय हुआ। 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना के 'ऑपरेशन विजय' द्वारा गोवा को विदेशी दासता से मुक्त कराकर भारत संघ में शामिल किया गया। 1987 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
गोवा भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा राज्य है। इसके पश्चिम में 160 किमी लंबा अरब सागर का तटीय मैदान है और पूर्व में सह्याद्रि (पश्चिमी घाट) की सघन पर्वत शृंखला है जहाँ भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य और नेत्रावली वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी स्थित हैं। मांडवी और जुआरी नदियां गोवा की जल-धमनियां हैं जो मोरमुगाओ प्राकृतिक बंदरगाह पर अरब सागर में विलीन होती हैं।
गोवा की संस्कृति 'सुसेगाद' (Sussegad) यानी तनावमुक्त, शांत और जीवन का आनंद लेने की जीवनशैली में रची-बसी है। गोवा कार्निवल, शिग्मो (कोंकणी वसंतोत्सव), और बॉम जीसस फीस्ट यहाँ के मुख्य पर्व हैं। कोंकणी भाषा, मांडो संगीत और ब्रास बैंड यहाँ के प्राण हैं। काजू और नारियल से बनी 'फेनी' (GI टैग प्राप्त पारंपरिक पेय), गोअन फिश करी-राइस, प्रॉन बाल्चाओ, बेबिका (16 परतों वाला पारंपरिक केक) और पोई ब्रेड यहाँ के प्रसिद्ध स्वाद हैं।
गोवा की यात्रा का पीक सीजन नवंबर से फरवरी है जब मौसम खुशनुमा होता है और न्यू ईयर व सनबर्न फेस्टिवल की धूम रहती है। हालांकि, प्रकृति और slow-travel प्रेमियों के लिए मानसून (जून-सितंबर) का समय सबसे सुंदर है जब झरने पूरे वेग में होते हैं, मसाले के बागान महकते हैं और भीड़ न्यूनतम रहती है। स्कूटी या जीप किराए पर लेकर दक्षिण गोवा के गांवों को एक्सप्लोर करना सबसे अच्छा तरीका है।
इस चर्च में ईसाई संत फ्रांसिस जेवियर का पार्थिव शरीर 1553 ई. से एक चांदी के ताबूत में रखा हुआ है। 470 से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह शरीर बिना किसी रासायनिक लेप के आश्चर्यजनक रूप से प्राकृतिक अवस्था में सुरक्षित है। प्रत्येक 10 वर्ष में इसके सार्वजनिक दर्शन (Exposition) कराए जाते हैं।
दूधसागर पहुंचने के लिए कुलेम (Kulem) रेलवे स्टेशन से वन विभाग द्वारा अधिकृत 4x4 जीप सफारी लेनी होती है, जो घने जंगलों और नदियों को पार कर प्रपात के तल तक पहुँचाती है। मानसून में जीप बंद रहती हैं, तब ट्रेन यात्रा द्वारा इसका विहंगम दृश्य देखा जाता है।
उत्तरी गोवा (बागा, कैलंगूट, अंजुना) नाइटलाइफ, वाटर स्पोर्ट्स, बीच पार्टियों और पिस्सू बाजारों के लिए जाना जाता है; जबकि दक्षिणी गोवा (पालोलेम, कोलवा, कावेलोसिम) शांति, स्वच्छता, लक्जरी रिसॉर्ट्स और अनछुए समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है।
बेबिका गोवा का पारंपरिक इंडो-पुर्तगाली केक है जो नारियल के दूध, अंडे की जर्दी, चीनी, मैदा और घी से बनता है। इसे परत-दर-परत धीमी आंच पर पकाया जाता है और इसमें पारंपरिक रूप से 7 से 16 परतें होती हैं।