बंगाराम द्वीप एवं टीयरड्रॉप लैगून, बंगाराम
अश्रु की बूंद के आकार का निर्जन द्वीप, जहाँ चारों ओर उथला फिरोजी लैगून है, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का शीर्ष स्कूबा डाइविंग व कयाकिंग स्थल।
अरब सागर में बिखरे 36 मूंगा (कोरल) द्वीपों का फिरोजी स्वर्ग, दूधिया सफेद रेत के किनारे, पारदर्शी लैगून में तैरती रंग-बिरंगी उष्णकटिबंधीय मछलियां, नारियल के सघन उपवन और मिनिकॉय की मालदीवी संस्कृति से सज्जित लक्षद्वीप भारत का सबसे विस्मयकारी समुद्री द्वीप समूह है।
अश्रु की बूंद के आकार का निर्जन द्वीप, जहाँ चारों ओर उथला फिरोजी लैगून है, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का शीर्ष स्कूबा डाइविंग व कयाकिंग स्थल।
लक्षद्वीप का प्रवेश द्वार, दोनों ओर नीले समुद्र से घिरी भारत की सबसे खूबसूरत हवाई पट्टी, ग्लास बॉटम बोट सफारी और कछुआ देखना।
लक्षद्वीप का दक्षिणतम द्वीप, मालदीव जैसी महल (Mahl) भाषा व संस्कृति, 300 फीट ऊंचा ऐतिहासिक लाइटहाउस और पारंपरिक नौका दौड़ (जहाधानी)।
राजधानी द्वीप, 17वीं सदी की लकड़ी पर अति-बारीक नक्काशीदार उजरा मस्जिद, मरीन एक्वेरियम और कोरल वॉच म्यूजियम।
8 किमी लंबा संकरा द्वीप, दोनों ओर विशाल प्रवाल लैगून, भारत का प्रमुख स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण केंद्र, स्नोर्कलिंग और विंडसर्फिंग।
1847 के तूफान में बहकर आई विशाल प्रवाल चट्टानों (कोरल बोल्डर्स) का किनारा, कयाकिंग, कैनोइंग और उथले लैगून में रीफ वॉक।
लक्षद्वीप (शाब्दिक अर्थ: 'एक लाख द्वीप') का उल्लेख 7वीं सदी के बौद्ध जातक कथाओं और संगम तमिल साहित्य में मिलता है। 7वीं सदी में हजरत उबैदुल्लाह ने यहाँ इस्लाम का प्रचार किया। 11वीं सदी में चोल सम्राट राजेंद्र चोल ने इन द्वीपों को अपने साम्राज्य में मिलाया। बाद में कन्नूर के अरक्कल राजवंश और टीपू सुल्तान का प्रभाव रहा। 1854 में अंग्रेजों ने द्वीपों पर नियंत्रण किया। 1956 में लक्षद्वीप को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है जिसका कुल भूमि क्षेत्रफल मात्र 32 वर्ग किमी है, परंतु इसका विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) 4,00,000 वर्ग किमी में फैला है। यह 36 कोरल एटोल (Coral Atolls) से बना है, जो समुद्र के नीचे डूबे ज्वालामुखी शिखरों के चारों ओर मूंगे के कीड़ों (Polyp) द्वारा कैल्शियम कार्बोनेट जमा करने से लाखों वर्षों में बने हैं। मिनिकॉय को मुख्य द्वीप समूह से '9 डिग्री चैनल' (Nine Degree Channel) अलग करता है।
उत्तरी और मध्य द्वीपों में मलयाली मूल की संस्कृति और जेसरी बोली बोली जाती है, जबकि दक्षिणतम मिनिकॉय में मालदीवियन मूल की 'महल' भाषा और मातृसत्तात्मक व्यवस्था है। 'कोलकाली' (लाठी नृत्य) और 'परीचकली' (ढाल-तलवार नृत्य) यहाँ के प्रमुख लोकनृत्य हैं। ताजी टूना मछली (स्किपजैक टूना), नारियल का दूध, राइस पुट्टू, मुस कबाब और सूखी टूना (मास मिन) लक्षद्वीप के मुख्य आहार हैं।
लक्षद्वीप की यात्रा के लिए भारत सरकार द्वारा अधिकृत एंट्री परमिट (e-Permit: epermit.utl.gov.in) लेना अनिवार्य है, जो कोच्चि के लक्षद्वीप प्रशासन द्वारा जारी किया जाता है। अगत्ती के लिए कोच्चि से एयर इंडिया की सीधी दैनिक उड़ानें हैं। पर्यावरण की सुरक्षा हेतु प्लास्टिक का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है और कोरल को छूना या तोड़ना कड़ा दंडनीय अपराध है।
एटोल अंगूठी के आकार की प्रवाल भित्ति होती है जो एक केंद्रीय लैगून को घेरे रहती है। लाखों वर्ष पूर्व जब समुद्र के भीतर प्राचीन ज्वालामुखी डूबे, तो उनके किनारों पर मूंगे के सूक्ष्म जीवों (कोरल पॉलिप्स) ने अपने चूने के खोल जमा किए, जिससे ये सुंदर प्रवाल द्वीप और उथले लैगून बने।
भारतीय नागरिकों को भी लक्षद्वीप जाने हेतु अधिकृत परमिट चाहिए। इसके लिए कोच्चि स्थित टूर ऑपरेटरों के माध्यम से या आधिकारिक पोर्टल पर पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और पहचान पत्र अपलोड करके 15 दिन पूर्व परमिट प्राप्त किया जा सकता है।
मिनिकॉय भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से मालदीव के अत्यंत निकट है। यहाँ की भाषा 'महल' (Mahl) है जो मालदीव की दिवेही भाषा की लिपि (थाना लिपि) में लिखी जाती है। यहाँ का समाज पूर्णतः मातृसत्तात्मक है जहाँ पति विवाह के बाद पत्नी के घर (अवा) में रहता है।
बंगाराम और कदमत द्वीप विश्व के शीर्ष डाइविंग स्पॉट्स में गिने जाते हैं। यहाँ पानी की दृश्यता 30 से 45 मीटर तक होती है, जहाँ मंटा रे, हॉक्सबिल कछुए, रीफ शार्क और बहुरंगी कोरल गार्डन आसानी से देखे जा सकते हैं।