लोकतक झील एवं तैरती फुमदियां, मोइरांग/बिष्णुपुर
पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, पानी पर तैरते प्राकृतिक गोलाकार द्वीप (फुमदी) और मछुआरों के तैरते हुए गांव।
विश्व की एकमात्र तैरती हुई लोकतक झील, फुमदी पर विचरते दुर्लभ शंगाई (नाचते हिरण), कांगला दुर्ग का 2,000 वर्ष प्राचीन मेइतेई राजवंशीय इतिहास और आधुनिक पोलो खेल की जन्मस्थली मणिपुर पूर्वोत्तर भारत का अमूल्य रत्न है।
पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, पानी पर तैरते प्राकृतिक गोलाकार द्वीप (फुमदी) और मछुआरों के तैरते हुए गांव।
विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान (Floating National Park), संकटग्रस्त शंगाई (Brow-antlered Deer) का अंतिम प्राकृतिक घर।
मेइतेई राजाओं की 2,000 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक राजधानी, पवित्र कांगला शा ड्रैगन प्रतीक और श्री गोविंदजी का कृष्ण मंदिर।
14 अप्रैल 1944 को कर्नल शौकत मलिक द्वारा भारत की मुख्य भूमि पर पहली बार फहराया गया तिरंगा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय।
2,835 मीटर की ऊंचाई पर खिली दुर्लभ सिरुई लिली (Lilium mackliniae) जो विश्व में केवल इसी पर्वत शिखर पर प्राकृतिक रूप से उगती है।
500 वर्ष पुराना एशिया का सबसे बड़ा केवल महिलाओं द्वारा संचालित बाजार (Women's Market), 5,000+ महिला व्यापारी।
मणिपुर का 33 ई. में राजा पाखंगबा द्वारा स्थापित मेइतेई राजवंश का दो सहस्राब्दियों का लिखित इतिहास 'चीथारोल कुम्बाबा' (शाही इतिहास) में दर्ज है। 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में बीर टिकेंद्रजीत और पाओना ब्रजबासी ने मातृभूमि की रक्षा में अद्भुत वीरता दिखाई। द्वितीय विश्व युद्ध में 1944 का इम्फाल युद्ध ब्रिटिश-भारतीय सेना और जापानी-आजाद हिंद फौज के बीच दुनिया की सबसे भयंकर लड़ाइयों में से एक था। 15 अक्टूबर 1949 को मणिपुर का भारत में विलय हुआ।
मणिपुर एक अंडाकार घाटी और उसे चारों ओर से घेरे हुए 9 समानांतर पर्वत शृंखलाओं से बना है। लोकतक झील घाटी के मध्य में स्थित एक विशाल जलतंत्र है। झील पर पाई जाने वाली 'फुमदी' सड़े हुए पौधों, मिट्टी और कार्बनिक पदार्थों का तैरता हुआ ठोस द्रव्यमान है, जिस पर स्थानीय मछुआरे झोपड़ियां (फुमसंग) बनाकर रहते हैं। उखरुल की पहाड़ियों में पाई जाने वाली सिरुई लिली को राज्य पुष्प घोषित किया गया है।
मणिपुरी रासलीला भारत के 8 शास्त्रीय नृत्यों में अत्यंत सौम्य और भक्तिमय नृत्य है जो राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम पर आधारित है। संकीर्तन (यूनेस्को अमूर्त धरोहर) ढोल और करताल के साथ किया जाने वाला सामूहिक गायन है। 'सगंग कांगजेई' (आधुनिक पोलो का मूल रूप) मणिपुर की ही देन है। मणिपुर का पारंपरिक मार्शल आर्ट 'थांग-ता' (तलवार और भाला युद्धकला) प्रसिद्ध है। चाक-हाओ (सुगंधित काला चावल, GI टैग), एरोंबा, कांगसोई और सिंद्धा यहाँ के विशिष्ट स्वाद हैं।
मणिपुर भ्रमण का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक है जब प्रतिवर्ष 21-30 नवंबर को भव्य 'मणिपुर संगाई महोत्सव' आयोजित होता है। इम्फाल देश के प्रमुख महानगरों से नियमित उड़ानों से जुड़ा हुआ है। लोकतक झील पर तैरते सेंद्रा द्वीप पर ठहरना प्रकृति का एक अविस्मरणीय अनुभव है।
केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान लोकतक झील के दक्षिण-पूर्वी भाग में 40 वर्ग किमी क्षेत्र में तैरती हुई 'फुमदी' (वनस्पतियों की मोटी परत) पर स्थित है। इसका 80% भाग पानी में डूबा रहता है और 20% भाग सतह पर तैरता है, जिस पर दुर्लभ शंगाई हिरण अपने खुरों से संतुलन बनाकर चलते हैं।
इम्फाल का इमा कीथेल (माताओं का बाजार) 16वीं सदी से संचालित है और यह विश्व का सबसे बड़ा महिला-संचालित व्यापारिक केंद्र है। यहाँ 5,000 से अधिक विवाहित महिलाएं वस्त्र, हस्तशिल्प और सब्जियां बेचती हैं। यह नारी सशक्तिकरण का विश्वस्तरीय प्रतीक है।
मणिपुर में पारंपरिक रूप से पोलो को 'सगोल कांगजेई' कहा जाता है जो मणिपुरी टट्टुओं पर सवार होकर बांस की छड़ी से खेला जाता था। 1850 के दशक में ब्रिटिश अधिकारियों ने सिलचर में इस खेल को देखा और 1859 में विश्व का पहला पोलो क्लब स्थापित किया।
14 अप्रैल 1944 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (INA) के कर्नल शौकत अली मलिक ने मोइरांग में पहली बार विदेशी दासता से मुक्त भारतीय भूमि पर स्वतंत्र भारत का तिरंगा फहराया था।