फॉन्गपुई राष्ट्रीय उद्यान (ब्लू माउंटेन), लावंगतलाई
मिजोरम का सर्वोच्च शिखर (2,157 मी), देवी-देवताओं का पवित्र पर्वत, दुर्लभ मिसेज ह्यूम तीतर, सुंदर ऑर्किड और रोडोडेंड्रोन के वन।
म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के मध्य 21 पर्वत शृंखलाओं, मिजोरम के सर्वोच्च शिखर फॉन्गपुई (ब्लू माउंटेन), बांस के लाठियों पर थिरकते विश्वप्रसिद्ध चेराव नृत्य और 91% साक्षरता वाले शत-प्रतिशत सामाजिक अनुशासन से परिपूर्ण मिजोरम पूर्वोत्तर की शांततम भूमि है।
मिजोरम का सर्वोच्च शिखर (2,157 मी), देवी-देवताओं का पवित्र पर्वत, दुर्लभ मिसेज ह्यूम तीतर, सुंदर ऑर्किड और रोडोडेंड्रोन के वन।
लौ नदी पर 229 मीटर (751 फीट) की ऊंचाई से बांस के घने जंगलों के बीच गिरता मिजोरम का सबसे ऊंचा दो-स्तरीय जलप्रपात।
समुद्र तल से 1,132 मीटर पर खड़ी पहाड़ी पर बसा शहर, सफेद संगमरमरी सोलोमन टेंपल, मिजोरम स्टेट म्यूजियम और डर्टलांग हिल्स।
1,548 मीटर ऊंचा खड़ी चट्टान वाला शिखर, पारंपरिक मिजो गांव जहाँ प्राचीन प्रमुखों के घर और लोक जीवन का सजीव दर्शन होता है।
1,619 मीटर की ऊंचाई पर प्राचीन वनों से आच्छादित हिल स्टेशन, जहाँ वार्षिक एंथ्यूरियम फेस्टिवल और वसंतोत्सव आयोजित होता है।
दक्षिणी मिजोरम के मारा स्वायत्त जिले में 30 हेक्टेयर में फैली सबसे बड़ी प्राकृतिक झील, जहाँ घने सदाबहार वर्षावन और जंगली हाथी पाए जाते हैं।
मिजो (पर्वत के निवासी) जातियों का इतिहास तिब्बत-बर्मा मूल के प्रवास से जुड़ा है, जो 16वीं-18वीं सदी के मध्य चिन पहाड़ियों से आकर यहाँ बसे। पारंपरिक मिजो समाज में युवा पुरुषों की शिक्षा और चरित्र निर्माण हेतु 'जावलबुक' (सामूहिक छात्रावास) केंद्रीय संस्था थी। 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लालडेंगा के बीच ऐतिहासिक 'मिजोरम शांति समझौता' हुआ, जिसने दशकों के उग्रवाद को समाप्त कर मिजोरम को देश का सबसे शांत राज्य बनाया। 20 फरवरी 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
मिजोरम उत्तर से दक्षिण की ओर फैली 21 प्रमुख समानांतर पर्वत शृंखलाओं (रिज़) और गहरी घाटियों से निर्मित है। राज्य का लगभग 88% भूभाग वनाच्छादित है, जिसमें बांस के जंगलों (माउ) की प्रधानता है। फॉन्गपुई (2,157 मी) राज्य का सर्वोच्च शिखर है जो म्यांमार सीमा के निकट स्थित है। चम्फाई के निकट स्थित 'रिह दिल' दिल के आकार की झील मिजो पौराणिक कथाओं में आत्माओं का पारगमन स्थल मानी जाती है।
मिजो समाज की आत्मा 'त्लावमंगाइहना' (Tlawmngaihna) के सिद्धांत पर टिकी है, जिसका अर्थ है निस्वार्थ सेवा, दूसरों की सहायता और सामाजिक अनुशासन। 'चेराव' (बांस नृत्य) मिजोरम का विश्वविख्यात लोकनृत्य है जिसमें बांस की ताल पर नर्तकियां चपलता से कदम रखती हैं। 'चापचार कुट' (वसंत उत्सव) उल्लास का महापर्व है। बाई (उबली हुई सब्जियों और सूअर के मांस का सूप), सॉवचियार (मांस और चावल की खिचड़ी) और बांस के कोपल पारंपरिक भोजन हैं।
मिजोरम जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी इनर लाइन परमिट (ILP) लेना अनिवार्य है, जो ऑनलाइन पोर्टल (ilp.mizoram.gov.in) या लेंगपुई हवाई अड्डे पर आगमन पर आसानी से मिल जाता है। यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सर्वोत्तम है। आइजोल शहर में शून्य हॉर्न (No Honking) और अनुशासित लेन ड्राइविंग भारत भर में अद्वितीय और प्रेरणादायक है।
चेराव मिजोरम का प्राचीनतम पारंपरिक नृत्य है। इसमें 4 से 8 पुरुष जमीन पर बांस की लाठियों को एक लयबद्ध ताल में आपस में टकराते हैं, जबकि रंग-बिरंगे पारंपरिक 'पुआन' वस्त्र पहने युवतियां तेजी से बांसों के बीच अपने कदम रखती हैं। यह चपलता और तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन है।
यह मिजो संस्कृति का नैतिक आचार संहिता है जिसका अर्थ है 'सदा दूसरों की भलाई के लिए तत्पर रहना, बिना किसी प्रतिफल की आशा के सहायता करना और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर समाज को रखना'। इसी कारण मिजोरम में अपराध दर न्यूनतम और सामाजिक समरसता सर्वोच्च है।
यह मिजोरम का सबसे बड़ा वसंत उत्सव है जो मार्च के प्रथम सप्ताह में मनाया जाता है। झूम खेती (जंगल की कटाई) पूरी होने के बाद नए फसल चक्र के स्वागत में पूरा मिजो समुदाय पारंपरिक परिधानों में लोकगीतों और चेराव नृत्य का आनंद लेता है।
आइजोल के राजमार्गों पर स्थित 'नगाहा लो डावर' ऐसी दुकानें हैं जहाँ कोई दुकानदार नहीं होता। किसान सब्जियां और फल रखकर उनके दाम लिख देते हैं और एक डिब्बा रख देते हैं। ग्राहक सामान लेकर डिब्बे में पैसे डाल देते हैं। यह मिजो समाज की ईमानदारी और आपसी विश्वास का जीवंत प्रमाण है।