श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर
सिख पंथ का सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र, 750 किलो शुद्ध स्वर्ण से मढ़ा मुख्य भवन, पवित्र अमृत सरोवर और 24 घंटे चलने वाला विश्व का सबसे बड़ा गुरु का लंगर।
सतलुज, ब्यास और रावी के उपजाऊ मैदानों, गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर शहादतों, श्री हरिमंदिर साहिब के अमृत सरोवर और देश के अन्नदाता किसानों का जीवंत गौरवशाली राज्य।
सिख पंथ का सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र, 750 किलो शुद्ध स्वर्ण से मढ़ा मुख्य भवन, पवित्र अमृत सरोवर और 24 घंटे चलने वाला विश्व का सबसे बड़ा गुरु का लंगर।
13 अप्रैल 1919 के बर्बर नरसंहार का गवाह, अमर ज्योति, गोलियों के निशानों वाली दीवारें और शहीदी कुआं जहाँ सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों ने प्राण त्यागे।
भारत-पाकिस्तान सीमा पर प्रतिदिन सूर्यास्त के समय बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच होने वाली देशभक्ति से ओत-प्रोत बीटिंग रिट्रीट ड्रिल।
मोशे सफदी द्वारा डिजाइन किया गया विश्वस्तरीय सिख संग्रहालय, 1699 ई. में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना स्थली।
ईसा पूर्व 6वीं सदी का भारत के प्राचीनतम किलों में से एक, जहाँ भारत की प्रथम महिला शासिका रजिया सुल्तान को कैद रखा गया था।
पंजाब का पेरिस कहलाने वाला कपूरथला, वर्साय के महल पर आधारित महाराजा जगतजीत सिंह का प्रासाद और मोरक्को शैली की मूरिश मस्जिद।
पंजाब ऋग्वेद की रचना स्थली 'सप्तसिंधु' रहा है। सिकंदर के आक्रमण (झेलम युद्ध), चंद्रगुप्त मौर्य और कुषाण साम्राज्य से लेकर 10 सिख गुरुओं के मार्गदर्शन में पंजाब ने आध्यात्मिक और सैन्य क्रांति देखी। 1799 में महाराजा रणजीत सिंह ने एक धर्मनिरपेक्ष और शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की। 1947 के विभाजन की सबसे भारी त्रासदी पंजाब ने झेली, परंतु अपने अदम्य पुरुषार्थ से हरित क्रांति के माध्यम से भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया।
पंजाब का अधिकांश भाग सतलुज, ब्यास और घग्गर नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का समतल मैदान है। उत्तर-पूर्व में शिवालिक की पहाड़ियों की संकरी पट्टी है। सतलुज और ब्यास के संगम पर स्थित हरिके पत्तन (हरिके वेटलैंड) उत्तर भारत का सबसे बड़ा रामसर आर्द्रभूमि स्थल है जहाँ सर्दियों में साइबेरिया से लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं।
भांगड़ा और गिद्दा पंजाब की ऊर्जा और उल्लास के वैश्विक प्रतीक हैं। बैसाखी, लोहड़ी और होला मोहल्ला (आनंदपुर साहिब में निहंग सिखों का युद्ध कौशल प्रदर्शन) राज्य के मुख्य उत्सव हैं। फुलकारी (रेशमी धागों की हाथ की कढ़ाई) यहाँ की पारंपरिक विरासत है। मक्के दी रोटी ते सरसों दा साग, अमृतसरिया कुल्चा, लस्सी, बटर चिकन और पिन्नी पंजाब के खानपान की विश्वव्यापी पहचान हैं।
पंजाब भ्रमण का सबसे सुंदर समय अक्टूबर से मार्च है जब सुनहरी धूप और सरसों के पीले खेत पूरे परिदृश्य को मनमोहक बना देते हैं। अमृतसर के लिए देश के सभी बड़े शहरों और विदेशों से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। स्वर्ण मंदिर में चौबीसों घंटे प्रवेश निःशुल्क है और लंगर सेवा में भाग लेना एक आध्यात्मिक अनुभव है।
श्री हरिमंदिर साहिब के गुरु रामदास लंगर में सामान्य दिनों में लगभग 1,00,000 और विशेष पर्वों पर 1,50,000 से अधिक लोग बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के एक पंगत में बैठकर निःशुल्क ताजा भोजन ग्रहण करते हैं।
1701 ई. में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा प्रारंभ किया गया होला मोहल्ला आनंदपुर साहिब में होली के अगले दिन आयोजित होता है। इसमें निहंग सिख पारंपरिक नीले बाने में घुड़सवारी, गतका (सिख युद्धकला) और तलवारबाजी का हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हैं।
लुधियाना के किला रायपुर में प्रत्येक वर्ष फरवरी में आयोजित होने वाले ग्रामीण ओलंपिक में बैलगाड़ी दौड़, ट्रैक्टर रेस, दांतों से भारी वजन उठाना और पारंपरिक कुश्ती जैसी अनूठी प्रतियोगिताएं होती हैं।
अमृतसरी कुल्चा आलू, गोभी या पनीर की स्टफिंग के साथ तंदूर में कुरकुरा सेका जाता है, जिस पर प्रचुर मात्रा में मक्खन लगाया जाता है और इमली-प्याज की चटनी व तीखे छोले के साथ परोसा जाता है।