उदयपुर सिटी पैलेस परिसर
पिछोला झील के पूर्वी तट पर 244 मीटर लंबा और 30.4 मीटर ऊंचा विशाल ग्रेनाइट व संगमरमर का राजमहल समूह।
अरावली की सुरम्य वादियों और सात आपस में जुड़ी झीलों की गोद में बसा उदयपुर भारत का सबसे सुरुचिपूर्ण और शांत जल-नगर है। 1559 में चित्तौड़गढ़ पर मुगलों के घेरे के उपरांत महाराणा उदयसिंह द्वितीय द्वारा स्थापित यह नगर मेवाड़ राजवंश के 1,400 वर्षों के अखंड स्वाभिमान, पिछोला झील पर तैरते श्वेत संगमरमरी जल महलों, सिटी पैलेस के 400 वर्ष पुराने झरोखों और जग मंदिर के विस्मयकारी वास्तु का जीवंत संगम है।
पिछोला झील के पूर्वी तट पर 244 मीटर लंबा और 30.4 मीटर ऊंचा विशाल ग्रेनाइट व संगमरमर का राजमहल समूह।
1362 में बंजारों द्वारा निर्मित और महाराणाओं द्वारा संवर्धित झील, जिसमें शाहजहां को शरण देने वाला द्वीप महल जग मंदिर स्थित है।
बांसधरा पहाड़ी पर 944 मीटर की ऊंचाई पर स्थित महल, जहां से बादलों, झीलों और अरावली पर सूर्यास्त का विहंगम दृश्य दिखता है।
शाही रानियों और उनकी सखियों के लिए महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित फव्वारों व कमल कुंडों वाला सुरम्य उद्यान।
1559 में जब मुगलों का दबाव बढ़ा, तो महाराणा उदयसिंह ने एक संत की सलाह पर अरावली की अभेद्य पहाड़ियों और आयड़ नदी के कछार में नई राजधानी का शिलान्यास किया। उदयपुर के संस्थापकों ने यहां अद्वितीय जल-अभियांत्रिकी विकसित की, जिसमें फतेह सागर, पिछोला, स्वरूप सागर और गोवर्धन सागर जैसी झीलों को नहरों के नेटवर्क से जोड़ा गया ताकि अतिरिक्त वर्षा जल व्यर्थ न बहे। इस जल प्रणाली ने न केवल नगर को अभेद्य जल दुर्ग बनाया, बल्कि थार के रेगिस्तान के निकट होते हुए भी उदयपुर को सदाबहार हरा-भरा और शीतल बनाए रखा।
पिछोला के किनारे स्थित सिटी पैलेस राजस्थान का सबसे बड़ा महल परिसर है। इसका निर्माण 1559 में उदयसिंह द्वारा शुरू होकर 20वीं सदी तक 22 महाराणाओं के काल में निरंतर विस्तृत होता रहा। इसके बावजूद पूरे महल में एक आश्चर्यजनक स्थापत्य समरूपता दिखाई देती है। महल के भीतर 'मोर चौक' में 5,000 कांच के टुकड़ों से बने तीन मोर, 'शीश महल', 'कृष्णा विलास' के लघु चित्र और 'मानक महल' का मयूर सिंहासन मेवाड़ की कलात्मक पराकाष्ठा को दर्शाते हैं।
सूर्यास्त के समय पिछोला झील में नौकायन उदयपुर का सबसे सम्मोहक अनुभव है। पानी में परावर्तित सिटी पैलेस की पीली रोशनी और जलमहल 'लेक पैलेस' (जग निवास) तैरते हुए कमल के समान प्रतीत होते हैं। जग मंदिर द्वीप पर बने हाथी द्वार और नक्काशीदार गुंबद वही स्थान हैं जहां मुगल राजकुमार खुर्रम (शाहजहां) ने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह के समय शरण ली थी और कहा जाता है कि इसी के श्वेत संगमरमर से प्रेरित होकर उन्होंने आगे चलकर ताजमहल बनवाया।
उदयपुर की शाम बागोर की हवेली में 'धरोहर' लोक नृत्य देखे बिना अधूरी है, जहां महिलाएं सिर पर 10-12 पीतल के मटके रखकर तलवारों की धार पर चरी व घूमर नृत्य करती हैं। स्थानीय खानपान में मेवाड़ का सुप्रसिद्ध 'लाल मांस' (मथानिया मिर्च में पका मटन), दाल-बाटी-चूरमा, मक्के की राब और जगदीश मंदिर के बाहर मिलने वाली केसरिया कुल्हड़ चाय अत्यंत लोकप्रिय हैं।
उदयपुर और आसपास के प्रमुख स्थलों (कुंभलगढ़, हल्दीघाटी, एकलिंगजी) के लिए 3 से 4 दिन का समय आदर्श माना जाता है।
शाम 4:30 से 6:00 बजे के बीच सूर्यास्त (Sunset Boat Cruise) सबसे अच्छा समय है, जब सुनहरी किरणें महलों और पानी पर अद्भुत छटा बिखेरती हैं।
कुंभलगढ़ दुर्ग उदयपुर से लगभग 85 किमी दूर है और सड़क मार्ग से जाने में 2 से 2.5 घंटे का समय लगता है।
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