कंचनजंघा का पावन धाम, गुरुडोंगमार झील एवं 100% जैविक राज्य

सिक्किम: कंचनजंघा, गुरुडोंगमार, नाथुला दर्रा, रुमटेक मठ एवं युमथांग का ज्ञानकोश

विश्व के तीसरे सर्वोच्च शिखर माउंट कंचनजंघा (8,586 मी), 17,800 फीट पर स्थित पवित्र गुरुडोंगमार झील, प्राचीन रेशम मार्ग (सिल्क रूट) के नाथुला दर्रे और भारत के पहले 100% पूर्ण जैविक राज्य के रूप में विख्यात सिक्किम हिमालय का शांत स्वर्ग है।

सिक्किम: एक दृष्टि में
राजधानी
गंगटोक
प्रशासनिक क्षेत्र
6 जिले (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, सोरेंग, पाक्योंग)
प्रमुख नदियां
तीस्ता, रंगीत, लाचेन, लाचुंग
सर्वोच्च शिखर / पहचान
माउंट कंचनजंघा (8,586 मी) — भारत का सर्वोच्च पर्वत
विश्व धरोहर / प्रमुख पहचान
कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान (भारत का एकमात्र मिश्रित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल)
भ्रमण का सर्वोत्तम समय
मार्च से मई (फूलों की बहार), अक्टूबर से दिसंबर (क्रिस्टल-क्लियर हिमालयी दृश्य)

शीर्ष आकर्षण एवं प्रमुख यात्रा परिपथ

उत्तरी सिक्किम पवित्र गुरुडोंगमार झील, उत्तरी सिक्किम

पवित्र गुरुडोंगमार झील, उत्तरी सिक्किम

समुद्र तल से 17,800 फीट (5,430 मी) पर स्थित विश्व की सबसे ऊंची झीलों में से एक, जहाँ गुरु नानक देव जी और गुरु पद्मसंभव के स्पर्श से शीतकाल में भी जल का एक भाग कभी नहीं जमता।

नाथुला नाथुला दर्रा एवं बाबा हरभजन सिंह मंदिर, पूर्वी सिक्किम

नाथुला दर्रा एवं बाबा हरभजन सिंह मंदिर, पूर्वी सिक्किम

14,140 फीट पर भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा, ऐतिहासिक रेशम मार्ग (सिल्क रूट) और भारतीय सेना के अमर शहीद कैप्टन 'बाबा' हरभजन सिंह का पावन बंकर मंदिर।

त्सोमगो त्सोमगो (चांगु) हिमनद झील, पूर्वी सिक्किम

त्सोमगो (चांगु) हिमनद झील, पूर्वी सिक्किम

12,310 फीट पर स्थित अंडाकार हिमनद झील, जहाँ बौद्ध लामा झील के बदलते रंगों को देखकर भविष्यवाणियां करते थे, याक सफारी और अल्पाइन दृश्य।

गंगटोक रुमटेक धर्मचक्र केंद्र, गंगटोक

रुमटेक धर्मचक्र केंद्र, गंगटोक

16वें ग्यालवा करमापा द्वारा स्थापित तिब्बती बौद्ध धर्म के कर्मा काग्यू संप्रदाय का सर्वोच्च मुख्यालय, स्वर्ण स्तूप और दुर्लभ 1,000 वर्ष पुरानी थंगका कलाकृतियां।

लाचुंग युमथांग घाटी (फूलों की घाटी), लाचुंग

युमथांग घाटी (फूलों की घाटी), लाचुंग

11,693 फीट पर स्थित 'वैली ऑफ फ्लावर्स', जहाँ वसंत में 24 प्रजातियों के रोडोडेंड्रोन (बुरांश) और अल्पाइन फूल पूरी घाटी को लाल-बैंगनी रंग में रंग देते हैं।

रवंगला तथागत त्सल (बुद्ध पार्क), रवंगला

तथागत त्सल (बुद्ध पार्क), रवंगला

दलाई लामा द्वारा 2013 में प्रतिष्ठित 130 फीट ऊंची भगवान बुद्ध की विशाल तांबे की प्रतिमा, जिसके पृष्ठभाग में माउंट नरसिंह और कंचनजंघा का विहंगम दृश्य है।

जिले एवं क्षेत्रीय यात्रा डायरेक्टरी

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं सांस्कृतिक उद्भव

सिक्किम को मूल लेप्चा भाषा में 'न्येल माएल' (स्वर्ग) और तिब्बती में 'डेन्जोंग' (चावल की छिपी हुई घाटी) कहा जाता है जिसे 8वीं सदी में गुरु पद्मसंभव ने आशीर्वाद दिया था। 1642 ई. में युक्तसोम में तीन विद्वान लामाओं द्वारा फुंतसोग नामग्याल को प्रथम 'चोग्याल' (धर्मराज) के रूप में ताज पहनाया गया, जिसने नामग्याल राजवंश की नींव रखी। 1975 में सिक्किम की जनता ने जनमत संग्रह द्वारा राजतंत्र समाप्त कर भारत संघ में 22वें राज्य के रूप में विलय को स्वीकृति दी।

भौगोलिक वैविध्य एवं प्रकृति व वन्यजीव

सिक्किम चारों ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और पर्वतों से घिरा है: उत्तर में तिब्बत (चीन), पूर्व में भूटान, पश्चिम में नेपाल और दक्षिण में पश्चिम बंगाल। माउंट कंचनजंघा (8,586 मी) सिक्किम-नेपाल सीमा पर स्थित है और सिक्किम के लोग इसे अपना रक्षक देवता (द्जो-न्गा) मानते हैं। तीस्ता नदी सिक्किम की जीवनधारा है। कंचनजंघा नेशनल पार्क यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों महत्वों के लिए 'मिश्रित विश्व धरोहर' घोषित भारत का एकमात्र स्थल है।

स्थानीय परंपराएं, उत्सव व खानपान

सिक्किम में लेप्चा, भूटिया और नेपाली समुदायों की समरसता है। 'पांग ल्हाबसोल' कंचनजंघा पर्वत की पूजा का अनूठा त्योहार है जिसमें मुखौटा नृत्य (लामा चाम) होता है। लोसर (तिब्बती नया साल) और सागा दावा (बुद्ध पूर्णिमा) प्रमुख बौद्ध पर्व हैं। पारंपरिक काष्ठ नक्काशी और थंगका चित्रकला यहाँ की विरासत हैं। मोमो, थुकपा, गुन्द्रुक (किण्वित पत्ते का सूप), सिंकी, सेल रोटी और छुरपी (याक के दूध का पनीर) यहाँ के पारंपरिक स्वाद हैं।

यात्रा योजना: कैसे पहुँचें एवं उपयोगी सुझाव

सिक्किम के अधिकांश सीमांत क्षेत्रों (त्सोमगो, नाथुला, गुरुडोंगमार, युमथांग) के लिए भारतीय नागरिकों को भी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) लेना पड़ता है, जो गंगटोक में पंजीकृत टूर ऑपरेटरों के माध्यम से आसानी से बनता है। प्लास्टिक की बोतलों पर सिक्किम में पूर्ण प्रतिबंध है। मार्च-मई फूलों के खिलने और अक्टूबर-दिसंबर साफ बर्फ के दृश्यों के लिए उत्तम हैं।

प्रमुख कनेक्टिविटी:
  • हवाई मार्ग: पाक्योंग विमानतल (PYG), बागडोगरा सिलीगुड़ी (IXB - 120 किमी)
  • रेल मार्ग: न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) / सिलिगुड़ी जंक्शन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गुरुडोंगमार झील (Gurudongmar Lake) का पानी सर्दियों में क्यों नहीं जमता?

स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब 8वीं सदी में गुरु पद्मसंभव (और 15वीं सदी में गुरु नानक देव जी) यहाँ आए, तो ग्रामीणों ने अत्यधिक ठंड में पेयजल जमने की समस्या बताई। गुरु जी ने झील के एक कोने को स्पर्श किया, जिसके बाद से उस विशेष भाग का पानी -30°C तापमान में भी कभी नहीं जमता।

सिक्किम को 100% जैविक राज्य (Organic State) का दर्जा कैसे मिला?

2003 में राज्य सरकार ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम को विश्व का पहला 100% जैविक कृषि राज्य घोषित किया, जिसके लिए इसे संयुक्त राष्ट्र (UN FAO) का 'फ्यूचर पॉलिसी गोल्ड अवार्ड' मिला।

खेचेओपलरी झील (Khecheopalri Lake) की क्या दिव्यता है?

पश्चिमी सिक्किम की यह पवित्र 'इच्छा-पूर्ति झील' बौद्धों और हिंदुओं दोनों के लिए पूज्य है। इसका आकार भगवान बुद्ध के पदचिह्न जैसा है। आश्चर्यजनक रूप से इस झील की सतह पर एक भी पत्ता नहीं गिरता; यदि कोई पत्ता गिरता है तो पक्षी तुरंत उसे अपनी चोंच से उठा लेते हैं।

सिल्क रूट का जुलुक (Zuluk) क्यों प्रसिद्ध है?

पूर्वी सिक्किम में प्राचीन भारत-तिब्बत सिल्क रूट पर स्थित जुलुक अपनी 32 हेयरपिन मोड़ (जलेबी मोड़) वाली सर्पीली सड़कों और थाम्बी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा पर स्वर्णिम सूर्योदय के लिए विश्वप्रसिद्ध है।