भारत का भूमिगत पाषाण जल स्थापत्य, वाव एवं बावलियां

भारत की ऐतिहासिक बावड़ियां: रानी की वाव, चांद बावड़ी एवं 246 पाषाण जल संरचनाओं का ज्ञानकोश

शुष्क और अर्ध-शुष्क मरुधरा में जल संचयन के लिए जमीन के भीतर 7 मंजिलों तक खोदे गए पाषाण मंदिर, पाटन की यूनेस्को रानी की वाव, आभानेरी की 3,500 सीढ़ियों वाली चांद बावड़ी और दिल्ली की अग्रसेन की बावली—भारत के अद्वितीय भूमिगत जल स्थापत्य का संपूर्ण ज्ञानकोश।

बावड़ियां एवं जल स्थापत्य: एक दृष्टि में
कुल प्रलेखित बावड़ियां
246+ ऐतिहासिक बावड़ियां व वाव
शिखर कालखंड
7वीं से 18वीं शताब्दी
यूनेस्को विश्व धरोहर
रानी की वाव, पाटन (गुजरात - 2014)
क्षेत्रीय नाम
वाव (गुजरात), बावड़ी/बावली (उत्तर भारत), कल्याणी/पुष्करिणी (दक्षिण भारत), विहीर (महाराष्ट्र)
स्थापत्य प्रकार
नंदा (एक मुखी), भद्रा (द्वि-मुखी), जया (त्रि-मुखी), सर्वतोभद्र (चार मुखी)
प्रमुख राज्य
गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक

शीर्ष आकर्षण एवं प्रमुख धरोहर स्थल

गुजरात रानी की वाव (यूनेस्को विश्व धरोहर), पाटन (गुजरात)

रानी की वाव (यूनेस्को विश्व धरोहर), पाटन (गुजरात)

1063 ई. में रानी उदयामति द्वारा निर्मित 7 मंजिला उल्टे मंदिर के आकार की विस्मयकारी बावड़ी, भगवान विष्णु के दशावतार की 800+ मूर्तियां।

राजस्थान चांद बावड़ी, आभानेरी (दौसा, राजस्थान)

चांद बावड़ी, आभानेरी (दौसा, राजस्थान)

8वीं-9वीं सदी में राजा चंद्र द्वारा निर्मित 13 मंजिला और 3,500 ज्यामितीय सीढ़ियों वाली विश्व की सबसे गहरी और विशालतम बावड़ी।

गुजरात अडालज की वाव, गांधीनगर/अहमदाबाद (गुजरात)

अडालज की वाव, गांधीनगर/अहमदाबाद (गुजरात)

1498 ई. में रानी रूदाबाई द्वारा निर्मित 5 मंजिला अष्टकोणीय सीढ़ीदार बावड़ी, सोलंकी और इंडो-इस्लामिक नक्काशी का अनूठा संगम।

दिल्ली अग्रसेन की बावली, कनॉट प्लेस (नई दिल्ली)

अग्रसेन की बावली, कनॉट प्लेस (नई दिल्ली)

महाराजा अग्रसेन द्वारा महाभारत काल में स्थापित और 14वीं सदी में पुनर्निर्मित 60 मीटर लंबी 108 सीढ़ियों वाली लाल बलुआ पत्थर की ऐतिहासिक बावली।

जयपुर पन्ना मीना का कुंड, आमेर (जयपुर)

पन्ना मीना का कुंड, आमेर (जयपुर)

16वीं सदी का सममित ज्यामितीय सीढ़ियों वाला सुंदर कुंड, जहाँ सीढ़ियों की बनावट ऐसी है कि जिस सीढ़ी से उतरें, उसी से चढ़ना असंभव लगता है।

बूंदी रानीजी की बावड़ी, बूंदी (राजस्थान)

रानीजी की बावड़ी, बूंदी (राजस्थान)

1699 ई. में रानी नाथावत जी द्वारा निर्मित 46 मीटर गहरी बावड़ी, कलात्मक मेहराबदार तोरण द्वार और गजराज की सुंदर नक्काशी।

प्राचीन भारत का जल-प्रबंधन एवं भूमिगत स्थापत्य

भारत के पश्चिमी भाग (गुजरात और राजस्थान) में अत्यधिक गर्मी और कम वर्षा के कारण भूजल स्तर गहरा होता था। प्राचीन भारतीय शिल्पकारों ने केवल कुएं खोदने के बजाय एक संपूर्ण भूमिगत महल का आविष्कार किया। बावड़ी (Stepwell) में जैसे-जैसे व्यक्ति सीढ़ियों से नीचे उतरता है, तापमान बाहर की तुलना में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस ठंडा हो जाता था। इस प्रकार ये बावड़ियां न केवल जल संचयन का साधन थीं, बल्कि यात्रियों, संतों और महिलाओं के लिए सामाजिक मिलन और ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थल भी थीं।

वास्तुशास्त्र एवं चार प्रकार की बावड़ियां

प्राचीन वास्तुशास्त्र ग्रंथ 'अपराजितपृच्छा' में बावड़ियों को उनके प्रवेश द्वारों के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 1. नंदा (एक प्रवेश द्वार और तीन मंडप), 2. भद्रा (दो प्रवेश द्वार और छह मंडप), 3. जया (तीन प्रवेश द्वार और नौ मंडप), और 4. सर्वतोभद्र (चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार और बारह मंडप)। पाटन की रानी की वाव 'जया' प्रकार की सर्वोत्कृष्ट कृति है।

बावड़ियों का संरक्षण एवं आधुनिक प्रासंगिकता

औपनिवेशिक काल में पाइपलाइन जल व्यवस्था आने के बाद कई बावड़ियों की उपेक्षा हुई और वे मलबे में दब गईं। परंतु वर्तमान में जल संकट के समाधान हेतु भारत सरकार और विरासत प्रेमियों द्वारा इन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है (जैसे हैदराबाद की बंसीलालपेट बावड़ी का जीर्णोद्धार)। इन स्थलों पर भ्रमण करते समय सीढ़ियों पर सावधानी से चलें और ऐतिहासिक पाषाण कला को स्पर्श से सुरक्षित रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पाटन की रानी की वाव को 'उल्टा मंदिर' (Inverted Temple) क्यों कहते हैं?

रानी की वाव को जमीन के ऊपर मंदिर बनाने के बजाय धरती के भीतर 7 मंजिलों (27 मीटर गहराई) में एक मंदिर के रूप में तराशा गया है। जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, भगवान विष्णु के दशावतार, शेषशायी विष्णु और अप्सराओं की 800 से अधिक मूर्तियां दिखाई देती हैं, मानो मंदिर को उल्टा कर जमीन में स्थापित कर दिया गया हो।

आभानेरी की चांद बावड़ी (Chand Baori) में कितनी सीढ़ियां हैं?

राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी में स्थित चांद बावड़ी में 13 मंजिलों में कुल 3,500 बेहद संकीर्ण और सममित ज्यामितीय सीढ़ियां हैं जो 20 मीटर गहराई तक उतरती हैं। इसका ऑप्टिकल इल्यूजन ऐसा है कि कोई भी व्यक्ति उतरते और चढ़ते समय एक ही सीढ़ी का प्रयोग नहीं कर पाता।

बावड़ी और साधारण कुएं में क्या बुनियादी अंतर है?

कुएं में पानी खींचने के लिए बाल्टी और रस्सी की आवश्यकता होती है, जबकि बावड़ी (Stepwell) में जल स्तर तक सीधे पहुँचने के लिए चौड़ी सीढ़ियों, मंडपों, स्तंभों और गैलरियों का निर्माण किया जाता था, जहाँ लोग नीचे जाकर सीधे पानी तक पहुँच सकते थे।