एकादश ज्योतिर्लिंग एवं पंच केदार

श्री केदारनाथ धाम, उत्तराखंड: ज्योतिर्लिंग इतिहास, ट्रैक व दर्शन मार्गदर्शिका

त्वरित यात्रा एवं दर्शन विवरण
कपाट खुलने का समय
अप्रैल/मई (अक्षय तृतीया के आसपास)
कपाट बंदी
भाई दूज (दीपावली के दूसरे दिन)
पैदल ट्रैक दूरी
16-18 किमी (गौरीकुंड से केदारनाथ)
शीतकालीन पूजा स्थल
ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ
हेलीकॉप्टर बेस
फाटा, सेरसी, गुप्तकाशी
विग्रह स्वरूप
त्रिकोणीय प्राकृतिक पाषाण शिला (नंदी पृष्ठ भाग)

गढ़वाल हिमालय के केदारखंड में, हिमाच्छादित केदारनाथ, खर्चाकुंड और भरतकुंड पर्वतों के मध्य स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च ऊंचाई पर स्थित स्वयंभू धाम है। यह छोटा चार धाम और पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, कल्पेश्वर) का प्रधान तीर्थ है।

महाभारत कालीन उत्पत्ति एवं पांडव इतिहास

महाभारत युद्ध के उपरांत अपने ही बंधु-बांधवों और गुरुजनों के वध के पाप (गोत्र हत्या) से मुक्ति पाने हेतु पांडव भगवान शिव के दर्शन के लिए निकले। भगवान शिव पांडवों से रुष्ट थे, अतः वे अंतर्धान होकर केदारखंड में एक महिष (बैल/भैंसे) का रूप धारण कर अन्य पशुओं के बीच जा मिले।

महाबली भीम ने दो विशाल पर्वतों पर अपने पैर फैला दिए। सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से निकल गए, किंतु महिष रूपी भगवान शिव नहीं निकले। भीम ने तुरंत पहचान कर जैसे ही महिष को पकड़ने का प्रयास किया, वह धरती में समाने लगा। भीम ने महिष के पृष्ठ भाग (कूबड़) को कसकर पकड़ लिया।

पांडवों की अनन्य भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव ने उन्हें दर्शन देकर समस्त पापों से मुक्त किया। महिष के शरीर के विभिन्न अंग पंच केदार के रूप में प्रकट हुए:

कत्यूरी वास्तुकला और आदि शंकराचार्य समाधि

वर्तमान भव्य प्रस्तर मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा करवाया गया था:

गौरीकुंड से केदारनाथ ट्रैक मार्गदर्शिका

  • ट्रैक की शुरुआत: गौरीकुंड (गर्म जल कुंड और माता गौरी की तपस्थली)।
  • मार्ग के मुख्य पड़ाव: गौरीकुंड → जंगलचट्टी (4 किमी) → भीमबली (3 किमी) → लिंचोली (4 किमी) → बेस कैंप (4 किमी) → केदारनाथ मंदिर (1 किमी)।
  • सुझाव: ट्रैक मार्ग पर पेयजल, शेड, मेडिकल कैंप और विश्राम स्थल बने हैं। पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक और ग्लूकोज अवश्य साथ रखें।

दैनिक पूजा एवं दर्शन समय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हां, उत्तराखंड सरकार के पर्यटन पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर चार धाम यात्रा हेतु बायोमेट्रिक पंजीकरण अनिवार्य है।
केदारनाथ में शिवलिंग पारंपरिक गोल आकार का न होकर एक विशाल त्रिकोणीय पाषाण शिला (नंदी के कूबड़) के रूप में स्वयंभू स्थित है।
वर्ष 2013 की प्रलयंकारी बाढ़ के दौरान पहाड़ से बहकर आई एक विशालकाय चट्टान मंदिर के ठीक पीछे आकर रुक गई, जिसने बाढ़ के मलबे को दो भागों में मोड़कर मुख्य मंदिर को ध्वस्त होने से बचा लिया। इसे श्रद्धालु 'भीम शिला' मानकर पूजते हैं।