गढ़वाल हिमालय के केदारखंड में, हिमाच्छादित केदारनाथ, खर्चाकुंड और भरतकुंड पर्वतों के मध्य स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च ऊंचाई पर स्थित स्वयंभू धाम है। यह छोटा चार धाम और पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, कल्पेश्वर) का प्रधान तीर्थ है।
महाभारत कालीन उत्पत्ति एवं पांडव इतिहास
महाभारत युद्ध के उपरांत अपने ही बंधु-बांधवों और गुरुजनों के वध के पाप (गोत्र हत्या) से मुक्ति पाने हेतु पांडव भगवान शिव के दर्शन के लिए निकले। भगवान शिव पांडवों से रुष्ट थे, अतः वे अंतर्धान होकर केदारखंड में एक महिष (बैल/भैंसे) का रूप धारण कर अन्य पशुओं के बीच जा मिले।
महाबली भीम ने दो विशाल पर्वतों पर अपने पैर फैला दिए। सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से निकल गए, किंतु महिष रूपी भगवान शिव नहीं निकले। भीम ने तुरंत पहचान कर जैसे ही महिष को पकड़ने का प्रयास किया, वह धरती में समाने लगा। भीम ने महिष के पृष्ठ भाग (कूबड़) को कसकर पकड़ लिया।
पांडवों की अनन्य भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव ने उन्हें दर्शन देकर समस्त पापों से मुक्त किया। महिष के शरीर के विभिन्न अंग पंच केदार के रूप में प्रकट हुए:
- पृष्ठ भाग (कूबड़): श्री केदारनाथ (त्रिकोणीय शिला रूप में पूजित)
- भुजाएं: श्री तुंगनाथ (विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर - 3,680m)
- मुख मंडल: श्री रुद्रनाथ
- नाभि: श्री मध्यमहेश्वर
- जटाएं: श्री कल्पेश्वर
कत्यूरी वास्तुकला और आदि शंकराचार्य समाधि
वर्तमान भव्य प्रस्तर मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा करवाया गया था:
- अविनाशी इंटरलॉकिंग संरचना: मंदिर का निर्माण भारी-भरकम ग्रेनाइट शिलाखंडों को इंटरलॉकिंग विधि से जोड़कर किया गया है। 2013 की भीषण जलप्रलय में जब पूरी केदार घाटी बह गई थी, तब भी मंदिर के पीछे प्राकृतिक रूप से आई विशाल 'भीम शिला' ने बाढ़ के प्रचंड वेग को दो धाराओं में बांट दिया और मुख्य मंदिर को खरोंच तक नहीं आई।
- आदि शंकराचार्य समाधि: मंदिर के ठीक पीछे जगतगुरु आदि शंकराचार्य का भव्य समाधि स्थल और उनकी प्रतिमा पुनर्निर्मित की गई है।
गौरीकुंड से केदारनाथ ट्रैक मार्गदर्शिका
- ट्रैक की शुरुआत: गौरीकुंड (गर्म जल कुंड और माता गौरी की तपस्थली)।
- मार्ग के मुख्य पड़ाव: गौरीकुंड → जंगलचट्टी (4 किमी) → भीमबली (3 किमी) → लिंचोली (4 किमी) → बेस कैंप (4 किमी) → केदारनाथ मंदिर (1 किमी)।
- सुझाव: ट्रैक मार्ग पर पेयजल, शेड, मेडिकल कैंप और विश्राम स्थल बने हैं। पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक और ग्लूकोज अवश्य साथ रखें।
दैनिक पूजा एवं दर्शन समय
- प्रातः महाभिषेक: भोर 04:00 से 07:00 बजे तक (विशेष अभिषेक पूजा)
- सामान्य दर्शन: प्रातः 07:00 से दोपहर 03:00 बजे तक
- विश्राम (पट बंद): अपराह्न 03:00 से 05:00 बजे तक
- सायंकाल श्रृंगार आरती: सायंकाल 06:30 से 07:30 बजे तक