चारमीनार एवं लाड बाजार, हैदराबाद
1591 ई. में मुहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा निर्मित चारमीनार, लाड बाजार की लाख की चूड़ियां और ऐतिहासिक मक्का मस्जिद।
मूसी और गोदावरी के उपजाऊ कछारों, काकतीय शासकों के अद्भुत तैरने वाले पाषाण मंदिरों, गोलकोंडा की हीरों की खदानों और दक्कनी गंगा-जमुनी तहजीब से सुवासित तेलंगाना भारत का 29वां राज्य है।
1591 ई. में मुहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा निर्मित चारमीनार, लाड बाजार की लाख की चूड़ियां और ऐतिहासिक मक्का मस्जिद।
कोहिनूर और होप डायमंड की मूल स्थली, ध्वनि विज्ञान (ध्वनि परावर्तन) का बेजोड़ चमत्कार और कुतुब शाही सुल्तानों के 7 विशाल मकबरे।
1213 ई. का यूनेस्को विश्व धरोहर मंदिर जिसकी ईंटें पानी में तैरती हैं, सैंडबॉक्स नींव तकनीक और मूर्तिकार रामप्पा के नाम पर नामित मंदिर।
काकतीय साम्राज्य की राजधानी, चार विशाल कीर्ति तोरण (काकतीय तोरणम) और 1163 ई. का एक हजार नक्काशीदार खंभों वाला रुद्रेश्वर मंदिर।
गोदावरी तट पर स्थित भगवान राम का पावन धाम जहाँ भक्त रामदास (कंचेरला गोपना) ने त्रेतायुगीन भक्ति परंपरा को अमर बनाया।
कृष्णा नदी पर निर्मित विश्व का सबसे बड़ा चिनाई वाला बांध और झील के मध्य द्वीप पर स्थित आचार्य नागार्जुन का बौद्ध संग्रहालय।
तेलंगाना का इतिहास सातवाहन काल (कोटालिंगाला) से आरंभ होकर 12वीं-14वीं सदी के काकतीय साम्राज्य (रानी रुद्रमादेवी एवं प्रतापरुद्र) के स्वर्णकाल तक पहुँचा। काकतीयों ने जल प्रबंधन हेतु टैंकों (चेरुवु) की शृंखला बनाई। 16वीं सदी में कुतुब शाही वंश ने हैदराबाद की स्थापना की और गोलकोंडा को वैश्विक हीरों की मंडी बनाया। 1724 से 1948 तक आसफ जाही निजामों का शासन रहा। 2 जून 2014 को तेलंगाना एक संप्रभु राज्य के रूप में स्थापित हुआ।
दक्कन के पठार पर स्थित तेलंगाना की भूमि लाल बलुई मिट्टी और ग्रेनाइट की विशाल प्राकृतिक चट्टानों (रॉक संरचनाओं) से युक्त है। गोदावरी और कृष्णा नदियां राज्य के उत्तरी और दक्षिणी भागों को समृद्ध बनाती हैं। कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना विश्व की सबसे बड़ी बहु-स्तरीय लिफ्ट परियोजना है। निर्मल जिले में स्थित कुंतला जलप्रपात (45 मी) तेलंगाना का सबसे ऊंचा जलप्रपात है।
बथुकम्मा (फूलों का लोक पर्व) और बोनालु तेलंगाना के राजकीय उत्सव हैं जो स्त्री शक्ति और प्रकृति की उपासना के प्रतीक हैं। मेदारम जतारा (सम्मक्का-सारलम्मा) कुंभ मेले के बाद भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समागम है। पोचमपल्ली इकत और गड़वाल साड़ियां अपनी अद्वितीय बुनाई के लिए जीआई टैग प्राप्त हैं। हैदराबादी दम बिरयानी, हलीम, मिर्ची का सालन और सर्वपिंडी यहाँ के प्रसिद्ध व्यंजन हैं।
तेलंगाना की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सुखद है। हैदराबाद के ऐतिहासिक स्मारकों (चारमीनार, चौमहल्ला पैलेस, सालार जंग म्यूजियम) को slow-travel के तहत देखने के लिए कम से कम 3 दिन रखें। वारंगल और रामप्पा मंदिर हैदराबाद से 150 किमी दूरी पर हैं और एक दिन के भ्रमण परिपथ के लिए उत्तम हैं।
काकतीय शिल्पकारों ने रामप्पा मंदिर के गोपुरम और छत के निर्माण में स्पंज जैसी छिद्रयुक्त हल्की ईंटों (Floating Bricks) का उपयोग किया था, जिनका घनत्व पानी से कम होने के कारण वे जल पर तैरती हैं और मुख्य संरचना पर भार नहीं डालतीं।
यह प्रत्येक 2 वर्ष में मुलुगु के मेदारम वन में आयोजित होने वाला एशिया का सबसे बड़ा जनजातीय उत्सव है, जिसमें 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां सम्मक्का और सारलम्मा के शौर्य को नमन करने गुड़ (बंगारम) अर्पित करते हैं।
चौमहल्ला पैलेस आसफ जाही निजामों का आधिकारिक राजप्रासाद था। इसमें भव्य दरबार हॉल (खिलवत मुबारक), 19 बेल्जियम क्रिस्टल झूमर और विंटेज रोल्स रॉयस कारों का ऐतिहासिक संग्रह है।
पोचमपल्ली (भूदान पोचमपल्ली) में धागों को पहले से बांधकर और रंगकर (Tie-dye Ikat) जटिल ज्यामितीय पैटर्न में बुना जाता है। इसे भारत का पहला हथकरघा जीआई टैग प्राप्त हुआ था।