दक्षिणेश्वर काली मंदिर एवं बेलूर मठ, कोलकाता
हुगली तट पर 1855 ई. में रानी रासमणि द्वारा निर्मित मां भवतारिणी का मंदिर जहाँ स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने साधना की, और स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित बेलूर मठ।
कंचनजंघा के तुषाराच्छादित शिखरों से लेकर गंगासागर के विशाल मुहाने और सुंदरवन के सघन मैंग्रोव वनों तक फैला पश्चिम बंगाल साहित्य, संगीत, अध्यात्म और क्रांति की पावन कर्मभूमि है।
हुगली तट पर 1855 ई. में रानी रासमणि द्वारा निर्मित मां भवतारिणी का मंदिर जहाँ स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने साधना की, और स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित बेलूर मठ।
हुगली नदी पर बिना किसी खंभे के 705 मीटर लंबा कैंटिलीवर हावड़ा ब्रिज और सफेद मकराना संगमरमर से निर्मित भव्य विक्टोरिया मेमोरियल।
यूनेस्को विश्व धरोहर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित प्रकृति की गोद में मुक्त शिक्षा का अनूठा संस्थान, छतिमतला एवं रवींद्र भवन।
विश्व का विशालतम डेल्टा और मैंग्रोव वन, सुंदरी के वृक्ष, खारे पानी के मगरमच्छ, गंगा डॉल्फ़िन और तैरने वाले रॉयल बंगाल टाइगर।
1881 ई. की यूनेस्को हेरिटेज नैरो-गेज रेलवे, बतासिया लूप, टाइगर हिल से कंचनजंघा पर स्वर्णिम सूर्योदय और विश्वप्रसिद्ध दार्जिलिंग चाय।
मल्ल राजाओं द्वारा 17वीं सदी में निर्मित पकी हुई लाल मिट्टी (टेराकोटा) के नक्काशीदार मंदिर, रासमंच, जोर-बंगला और बालूचरी साड़ियां।
पश्चिम बंगाल का इतिहास मौर्य और गुप्त साम्राज्यों के उपरांत शशांक, पाल और सेन राजवंशों के सांस्कृतिक गौरव से समृद्ध रहा। पाल काल में महायान बौद्ध धर्म और नालंदा-विक्रमशिला परंपरा को अभूतपूर्व संरक्षण मिला। 1757 के प्लासी युद्ध के बाद ब्रिटिश साम्राज्य का उदय यहीं से हुआ। 19वीं सदी का 'बंगाल पुनर्जागरण' (राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, बंकिम चंद्र चटर्जी, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस) पूरे भारत के आधुनिक चिंतन का स्रोत बना।
पश्चिम बंगाल भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जो उत्तर में हिमालय की 3,600+ मीटर ऊंची चोटियों से लेकर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी के समुद्र तट तक फैला है। गंगा नदी फरक्का बैराज के बाद पद्मा (बांग्लादेश) और भागीरथी-हुगली (पश्चिम बंगाल) में विभाजित होकर विश्व का सबसे बड़ा सुंदरवन डेल्टा बनाती है। उत्तर में डुआर्स के तराई वन एक सींग वाले गैंडों और हाथियों का घर हैं।
पश्चिम बंगाल की 'दुर्गा पूजा' को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) का दर्जा दिया गया है। बाउल संगीत, रबीन्द्र संगीत और चौ लोक नृत्य यहाँ के सांस्कृतिक स्वर हैं। बंगाल की जामदानी, बालूचरी और तसर सिल्क हथकरघा कला विश्वविख्यात है। रसगुल्ला (रोशोगोल्ला), संदेश, मिष्टी दोई, माछेर झोल (हिल्सा व रोहू) और कोशा मांगशो बंगाली खानपान के प्राण हैं।
पश्चिम बंगाल भ्रमण का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च है जब मौसम अत्यंत सुहावना रहता है। दुर्गा पूजा (अश्विन मास) के दौरान कोलकाता की यात्रा पंडाल स्थापत्य और कला का अप्रतिम अनुभव प्रदान करती है। दार्जिलिंग टॉय ट्रेन की सवारी के लिए न्यू जलपाईगुड़ी या घूम स्टेशन से अग्रिम टिकट बुक करें।
कोलकाता की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि विश्व का सबसे बड़ा सार्वजनिक कला उत्सव (Public Art Festival) है। शहर भर में हजारों थीम-आधारित पंडाल, ढाक की थाप, सिंदूर खेला और विसर्जन शोभायात्रा इसे अद्वितीय बनाते हैं।
सुंदरवन में कोई जीप सफारी नहीं होती। यहाँ पूरी सफारी केवल पंजीकृत मोटर बोट के माध्यम से ज्वारीय नदियों और खाड़ियों में की जाती है। सोजनेखाली और दोबांकी वॉचटावर से बाघ और मगरमच्छ देखे जा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल का सर्वोच्च शिखर सन्दकफू (3,636 मी) विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ से दुनिया के 5 सर्वोच्च शिखरों में से 4—माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा, ल्होत्से और मकालू—स्पष्ट दिखाई देते हैं।
पौष मेला प्रतिवर्ष 7 पौष (दिसंबर के अंतिम सप्ताह) को शांतिनिकेतन में आयोजित होता है, जिसमें बाउल गायक, संथाल नर्तक और ग्रामीण दस्तकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।