स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, केवडिया/एकता नगर
नर्मदा तट पर स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, वैली ऑफ फ्लावर्स एवं सरदार सरोवर बांध।
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ से लेकर भगवान श्रीकृष्ण की पावन द्वारका नगरी, रानी की वाव का पाषाण जल स्थापत्य, साबरमती आश्रम और गिर के एशियाई सिंहों तक फैला गुजरात भारत की उद्यमिता, संस्कृति और स्थापत्य का गौरवशाली राज्य है।
नर्मदा तट पर स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, वैली ऑफ फ्लावर्स एवं सरदार सरोवर बांध।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ, अरब सागर तट पर चालुक्य शैली का भव्य मंदिर, बाणस्तंभ और ऐतिहासिक अखंड ज्योति।
चार धामों में पावन मोक्षपुरी, 72 स्तंभों पर स्थित 5 मंजिला जगत मंदिर, गोमती संगम और 52 गज की पवित्र ध्वजा।
विश्व का सबसे बड़ा नमक का मरुस्थल, पूर्णिमा की रात चांदनी में चमकता सफेद रण, पारंपरिक भुंगा टेंट और लोक संगीत।
अफ्रीका के बाहर विश्व में केवल गुजरात में पाए जाने वाले एशियाई बब्बर शेर (Asiatic Lion) का एकमात्र प्राकृतिक अभयारण्य।
11वीं सदी में रानी उदयामति द्वारा निर्मित 7 मंजिला उल्टे मंदिर के आकार की विस्मयकारी सीढ़ीदार बावड़ी, 800+ मूर्तियां।
गुजरात का इतिहास सिन्धु-सरस्वती सभ्यता (लोथल का प्राचीन गोदीबाड़ा और धोलावीरा का विश्वस्तरीय जल प्रबंधन) से प्रारंभ होता है। मौर्य साम्राज्य (गिरनार में अशोक के शिलालेख), सोलंकी (चालुक्य) स्वर्णकाल (सिद्धराज जयसिंह व कुमारपाल) ने मोढेरा और रानी की वाव जैसे अद्भुत स्मारकों का निर्माण कराया। 20वीं सदी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने यहाँ से भारतीय स्वाधीनता संग्राम और 562 देशी रियासतों के एकीकरण का नेतृत्व किया।
गुजरात की 1,600 किमी लंबी तटरेखा भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबी है। इसके तीन मुख्य भौगोलिक क्षेत्र हैं: 1. कच्छ का विशाल सफेद नमक मरुस्थल, 2. काठियावाड़ (सौराष्ट्र) का प्रायद्वीप जहाँ गिरनार और मांडव पहाड़ियाँ स्थित हैं, और 3. नर्मदा, ताप्ती व साबरमती द्वारा निर्मित उपजाऊ मैदानी भाग। लिटल रण ऑफ कच्छ विश्व के अंतिम जंगली गधों (खुर) का एकमात्र अभयारण्य है।
नवरात्रि में माँ अंबे की आराधना में 9 रातों तक होने वाला गरबा और डांडिया विश्व का सबसे लंबा नृत्य उत्सव है। कच्छी कढ़ाई, बांधनी (बंधेज), रोगन कला, पाटन पटोला और अकीक शिल्प कला के शिखर हैं। शुद्ध शाकाहारी गुजराती थाली (दाल, भात, रोटली, शाक, ढोकला, खांडवी, फाफड़ा-जलेबी और उंधियू) अपनी संतुलित मिठास और स्वाद के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
गुजरात की यात्रा का सर्वोत्तम समय नवंबर से फरवरी का है जब कच्छ के रण में विश्वप्रसिद्ध 'रण उत्सव' आयोजित होता है। अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन और वंदे भारत ट्रेनें संचालित हैं। slow-travel के तहत पाटन की पटोला कार्यशालाओं और भुज के जनजातीय हस्तशिल्प गांवों का भ्रमण अविस्मरणीय अनुभव है।
1026 ई. में सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम द्वारा निर्मित मोढेरा सूर्य मंदिर की बनावट ऐसी है कि विषुव (Equinox) के दिन उगते सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भगृह में स्थापित सूर्य प्रतिमा के मस्तक पर पड़ती थी।
पाटन का पटोला 'डबल इकत' तकनीक से शुद्ध रेशम पर प्राकृतिक रंगों द्वारा बुना जाता है। इसमें ताना और बाना दोनों को बुनाई से पहले रंगा जाता है। एक साड़ी बनाने में 4 से 6 महीने का समय लगता है और इसका रंग 300 वर्षों तक नहीं उड़ता।
भावनगर के पालीताना में शत्रुंजय पहाड़ी पर 865 से अधिक संगमरमर के नक्काशीदार जैन मंदिर स्थित हैं। यह विश्व का एकमात्र ऐसा पर्वत है जहाँ केवल मंदिरों का साम्राज्य है और सूर्यास्त के बाद पर्वत पर किसी भी मनुष्य का ठहरना वर्जित है।
कच्छ के खादिर बेट में स्थित धोलावीरा 4,500 वर्ष प्राचीन हड़प्पा कालीन नगर है, जो अपनी त्रि-स्तरीय नगर योजना, पत्थरों के दुर्ग और विशाल वर्षा जल संचयन जलाशयों (Water Reservoirs) के लिए विख्यात है।