राष्ट्रीय उद्यान • 202 वर्ग किमी • हूलॉक गिब्बन अभयारण्य

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान: भारत के एकमात्र कपि (हूलॉक गिब्बन), ब्लिथ्स ट्रैगोपैन एवं सदाबहार वर्षावन

1. इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान: भारत के एकमात्र कपि (हूलॉक गिब्बन) का सुरक्षित वर्षावन

पेरेन जिले की हरी-भरी पहाड़ियों में 202.02 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत भूभाग पर फैला इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान (Intanki National Park) नागालैंड का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और भारत के सर्वाधिक जैव-विविधता संपन्न वर्षावनों में से एक है। 1923 में औपनिवेशिक काल में इसे आरक्षित वन घोषित किया गया था और 1993 में इसे पूर्ण राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान (Intanki National Park) पूर्वोत्तर भारत में पश्चिमी हूलॉक गिब्बन (Western Hoolock Gibbon - Hoolock hoolock) का सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित प्राकृतिक पर्यावास है। हूलॉक गिब्बन भारत का एकमात्र कपि (Ape) है, और इंतांकी की घनी, अविरल सदाबहार छतरी (Canopy) इस वृक्षवासी प्राइमेट के अस्तित्व के लिए जीवनरेखा है। सुबह के समय सूर्य की पहली किरणें निकलते ही इंतांकी के वनों में नर और मादा गिब्बन का युगल गायन (Duetting Calls) कई किलोमीटर दूर तक गूंजता है, जो उनके प्रादेशिक अधिकार और सामाजिक बंधन को मजबूत करता है। ये वानर पेड़ों की 30 से 40 मीटर ऊंची शाखाओं पर ब्राकिएशन (Brachiation - हाथों के बल झूलना) की अद्भुत कला में माहिर हैं और जमीन पर कभी नहीं उतरते। इंतांकी में अंजीर (Ficus) और जंगली जामुन के वृक्षों की प्रचुरता इनके पोषक आहार का मुख्य आधार है। हूलॉक गिब्बन के अलावा, यहां कैप्ड लंगूर (Trachypithecus pileatus) और स्टंप-टेल्ड मकाक की स्वस्थ आबादी पाई जाती है।

2. जैव-विविधता स्पेक्ट्रम: एशियाई हाथी, क्लाउडेड लेपर्ड एवं शिकारी जीव

202 वर्ग किलोमीटर में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान का परिदृश्य एशियाई हाथियों (Asian Elephant - Elephas maximus) का एक ऐतिहासिक गलियारा है, जो असम के कार्बी आंगलोंग पठार से बराइल पर्वतमाला तक फैला हुआ है। इंतांकी के घने बांस के कुंज और दलदली घास के मैदान हाथियों के झुंडों को आदर्श पोषण प्रदान करते हैं। शिकारी जीवों में, इंतांकी का सबसे मायावी निवासी 'धूमिल तेंदुआ' (Clouded Leopard - Neofelis nebulosa) है, जो अपनी लंबी पूंछ और अद्भुत वृक्ष-आरोहण क्षमता के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही सामान्य तेंदुआ, जंगली कुत्ता (Dhole), मलयन सन बियर, हिमालयी काला भालू, और भारतीय अजगर यहां के खाद्य-श्रृंखला के शीर्ष पर स्थित हैं। पक्षी जगत में, यह पार्क दुर्लभ ब्लीथ्स ट्रैगोपान, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल और सफेद पंखों वाली जंगली बत्तख (White-winged Wood Duck) का सुरक्षित घर है।

3. नदीय पारिस्थितिकी: धनसिरी एवं मोंग्लू नदियों का जलग्रहण बेसिन

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान की जीवनरेखा इसकी दो प्रमुख नदियां हैं — धनसिरी (Dhansiri) और मोंग्लू (Monglu)। ये नदियां घने वर्षावनों के बीच से होकर बहती हैं, जिससे पार्क में आर्द्र और दलदली पॉकेट्स का निर्माण होता है। वर्षा ऋतु में इन नदियों की बाढ़ से मिट्टी में पोषक तत्वों का नवीनीकरण होता है, जिससे ऊंचे डिप्टरोकार्प (Dipterocarpus) वृक्ष, जंगली दालचीनी और विशालकाय फर्न फलते-फूलते हैं। नदियों के रेतीले किनारों पर दलदली कछुए, ओटर (ऊदबिलाव) और दर्जनों प्रजातियों की दुर्लभ मछलियां पाई जाती हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखती हैं।

4. पक्षी-वैभव: ब्लिथ्स ट्रैगोपैन, ग्रेट हॉर्नबिल एवं दुर्लभ जलीय पक्षी

पक्षी-प्रेमियों के लिए यह उद्यान एक अप्रतिम खजाना है। नागालैंड का राजकीय पक्षी ब्लिथ्स ट्रैगोपैन (Tragopan blythii), ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल, ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल, काला सारस और सफेद पंखों वाली जंगली बत्तख (White-winged Wood Duck) यहां के शांत वनों में पाई जाती हैं।

5. स्थानीय जेलियांग्रॉन्ग व कुकी समुदाय: संयुक्त वन प्रबंधन एवं 'मिथुन' संरक्षण

इंतांकी का संरक्षण इतिहास स्थानीय स्वदेशी समुदायों के सहयोग की एक प्रेरक गाथा है। पेरेन जिले के जेलियांग्रोंग (Zeme, Liangmai, Rongmei) और कुकी आदिवासी सदियों से इन वनों के पारंपरिक संरक्षक रहे हैं। अतीत में अवैध शिकार और वन कटाव की समस्याओं के बाद, वन विभाग ने स्थानीय ग्राम परिषदों के साथ मिलकर 'इको-डेवलपमेंट समितियां' (EDCs) गठित की हैं। स्थानीय आदिवासी युवाओं को 'कम्युनिटी फॉरेस्ट गार्ड्स' के रूप में प्रशिक्षित किया गया है जो अवैध शिकार को रोकने के लिए आधुनिक जीपीएस और पारंपरिक ट्रैकिंग ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस संयुक्त संरक्षण मॉडल के कारण पार्क में वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उद्यान के सीमावर्ती बफर वनों में ग्रामीण अपने पवित्र राजकीय पशु मिथुन (Bos frontalis) का पारंपरिक चराई-पालन करते हैं, जो आधुनिक वन्यजीव संरक्षण और स्वदेशी जनजातीय जीवन के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का अद्वितीय उदाहरण है।

6. सफारी गेट्स, जोन, समय सारिणी, शुल्क एवं ट्रांजिट लॉजिस्टिक्स

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा की योजना: • प्रवेश द्वार व पहुंच: पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पेरेन जिले के जालुकी (Jalukie) कस्बे के निकट स्थित है, जो दीमापुर से लगभग 37 किमी दूर है। दीमापुर से निजी टैक्सी या सुमो द्वारा जालुकी तक 1.5 घंटे में पहुंचा जा सकता है। • परमिट प्रक्रिया: पार्क में प्रवेश हेतु दीमापुर स्थित वन्यजीव प्रभाग कार्यालय (Wildlife Warden Office) या कोहिमा से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। • सफारी का समय: प्रातःकालीन सफारी सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक तथा दोपहर की सफारी 2:00 बजे से 5:00 बजे तक संचालित होती है। पार्क के अधिकांश हिस्सों में केवल वन विभाग द्वारा अनुमोदित 4x4 जिप्सी या गाइडेड नेचर वॉक की अनुमति है। • ठहरने की व्यवस्था: जालुकी और दीमापुर में होटल और होमस्टे उपलब्ध हैं। पार्क के भीतर वन विश्राम गृह में ठहरने के लिए वन विभाग से पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान भारत के एकमात्र वनमानुष (Ape) 'पश्चिमी हूलॉक गिब्बन' (Western Hoolock Gibbon - Hoolock hoolock) का सुरक्षित प्राकृतिक आवास है। इसके अतिरिक्त यहां दुर्लभ प्राइमेट्स जैसे स्लो लोरिस, कैप्ड लंगूर, और स्टंप-टेल्ड मकाक भी पाए जाते हैं।

उद्यान में प्रवेश के लिए पेरेन जिला वन अधिकारी (DFO Peren / Wildlife Warden) कार्यालय या जालूकी स्थित रेंज कार्यालय से पूर्व अनुमति और परमिट प्राप्त करना अनिवार्य है। सफारी के दौरान वन विभाग द्वारा अधिकृत स्थानीय गाइड साथ रखना आवश्यक है।

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान के भ्रमण का सर्वोत्तम समय नवंबर से अप्रैल के मध्य शुष्क शीतकालीन महीनों में है। इस दौरान वन मार्ग सूखे रहते हैं और जलस्रोतों के समीप हाथियों, गिब्बनों और प्रवासी पक्षियों के दर्शन सुगमता से होते हैं। मानसून (जून-सितंबर) में भारी वर्षा के कारण सफारी बंद रहती है।

इंतांकी राष्ट्रीय उद्यान दीमापुर शहर से केवल 40 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। दीमापुर से जालूकी होते हुए पक्की सड़क द्वारा निजी टैक्सी या किराए के वाहन से लगभग 1.5 घंटे में उद्यान के मुख्य प्रवेश द्वार तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

उद्यान के मुख्य प्रवेश द्वार और जालूकी में वन विश्राम गृह (Forest Rest House) उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त समीपवर्ती पेरेन और दीमापुर में निजी होटल और पर्यावरण-अनुकूल रिसॉर्ट्स प्रचुरता से उपलब्ध हैं।

उद्यान के चारों ओर बसे जेलियांग्रॉन्ग (जेमे व लियांगमाई) और कुकी जनजातीय समुदायों ने शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर वन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) समितियां बनाई हैं। वे स्थानीय जैव-विविधता और पवित्र मिथुन (Bos frontalis) के प्राकृतिक चरागाहों का संरक्षण करते हैं।

उद्यान में नागालैंड का राज्य पक्षी ब्लिथ्स ट्रैगोपैन (Blyth's Tragopan), ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल, ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल, काला सारस, और तीतरों की अनेक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे बर्डवॉचर्स का स्वर्ग बनाती हैं।

हां, वन विभाग द्वारा निर्धारित प्रकृति ट्रेल्स पर वन रेंजर और अधिकृत स्थानीय जनजातीय गाइड की निगरानी में गाइडेड नेचर वॉक और बर्डवॉचिंग ट्रेक की अनुमति दी जाती है। घने वर्षावन में अकेले जाने की सख्त मनाही है।