हम्पी विजयनगर खंडहर, बल्लारी/विजयनगर
यूनेस्को विश्व धरोहर 14वीं सदी का विजयनगर साम्राज्य, विजय विट्ठल मंदिर का पाषाण रथ, संगीतमय स्तंभ और विरुपाक्ष मंदिर।
तुंगभद्रा के तट पर बिखरे विजयनगर के पाषाण विस्मय हम्पी से लेकर बादामी की चालुक्य गुफाओं, बेलूर-हलेबिडु के होयसल मंदिरों और कुर्ग के कॉफी बागानों तक फैला कर्नाटक दक्षिण भारत की समृद्धतम सांस्कृतिक धरोहर है।
यूनेस्को विश्व धरोहर 14वीं सदी का विजयनगर साम्राज्य, विजय विट्ठल मंदिर का पाषाण रथ, संगीतमय स्तंभ और विरुपाक्ष मंदिर।
वोडेयार राजवंश का इंडो-सारासेनिक स्थापत्य का उत्कृष्ट महल, 97,000 बल्बों से जगमगाती रोशनी और विश्वप्रसिद्ध मैसूर दशहरा।
चालुक्य कालीन 6वीं-8वीं सदी की लाल बलुआ पत्थर को तराश कर बनाई गई 4 शैलकृत गुफाएं और अगस्त्य झील तट पर स्थित मंदिर।
भारत का स्कॉटलैंड, सुगन्धित अरेबिका व रोबस्टा कॉफी के बागान, अब्बी फॉल्स, ब्रह्मगिरि अभयारण्य और कोडव योद्धा संस्कृति।
यूनेस्को विश्व धरोहर 12वीं सदी के सोपस्टोन पर तराशे गए विस्मयकारी तारे के आकार के मंदिर, मदनिका मूर्तियां और स्थापत्य प्रतिभा।
नीलगिरि बायोस्फीयर का प्रमुख बाघ और एशियाई हाथी आवास, घने सागौन के जंगल और वन्यजीव सफारी का शीर्ष केंद्र।
कर्नाटक का इतिहास मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के श्रवणबेलगोला में संलेखना से लेकर कदंब, चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल और विजयनगर साम्राज्यों के अभ्युदय का साक्षी रहा है। विजयनगर काल (कृष्णदेवराय) को दक्षिण भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। 18वीं सदी में हैदर अली और टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को कड़ी चुनौती दी। कित्तूर की रानी चेन्नम्मा ने 1824 में स्वाधीनता का बिगुल फूंका।
भौगोलिक रूप से कर्नाटक तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित है: तटीय करावली (अरब सागर तट), पश्चिमी घाट का सघन सदाबहार मलयनाडु और दक्कन का विशाल बयालुसीमे (मैदानी पठार)। कावेरी और कृष्णा नदियां राज्य की कृषि रीढ़ हैं। जोग प्रपात (253 मी) भारत के उच्चतम असंपृक्त जलप्रपातों में से एक है। बांदीपुर, नागरहोल, भद्रा और अंशी राष्ट्रीय उद्यान समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण हैं।
यक्षगान (पारंपरिक लोक रंगमंच), गुल्लम्मा, और वीरागसे कर्नाटक की जीवंत लोक कलाएं हैं। मैसूर का दशहरा उत्सव पूरे विश्व में विख्यात है जिसमें जम्बू सवारी (सुसज्जित हाथियों का जुलूस) निकाली जाती है। मैसूर सिल्क, चन्नापटना के काष्ठ खिलौने और बीदरी धातु शिल्प भौगोलिक संकेतक (GI) प्राप्त धरोहर हैं। बीसी बेले भात, मैसूर पाक, नीर डोसा, मंगलोरियन घी रोस्ट और कुर्ग पांडि करी यहाँ के विशिष्ट स्वाद हैं।
कर्नाटक भ्रमण के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सुखद है। मानसून के समय (जुलाई-सितंबर) पश्चिमी घाट और जोग प्रपात की हरियाली व जलधाराएं देखने योग्य होती हैं। बेंगलुरु और मैसूर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस उपलब्ध है। हम्पी और बादामी को slow-travel के तहत साइकिल या पैदल चलकर देखने का आनंद अद्वितीय है।
हम्पी के 25 वर्ग किलोमीटर में फैले 500 से अधिक स्मारकों, विट्ठल मंदिर, विरुपाक्ष और तुंगभद्रा के उस पार अनेगुंडी को देखने के लिए कम से कम 3 पूरे दिन आवश्यक हैं।
श्रवणबेलगोला में विंध्यगिरि पहाड़ी पर स्थित 57 फीट ऊंची भगवान बाहुबली (गोमटेश्वर) की एकाश्म प्रतिमा विश्व की विशालतम मुक्त-खड़ी मूर्तियों में से एक है। यहाँ प्रत्येक 12 वर्ष में 'महामस्तकाभिषेक' महोत्सव आयोजित होता है।
2023 में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त बेलूर, हलेबिडु और सोमनाथपुरा के होयसल मंदिर सोपस्टोन (क्लोराइट शिस्ट) पर की गई अति-बारीक नक्काशी, तारे के आकार के चबूतरे और अनुपम मूर्तिकला के लिए विख्यात हैं।
कुर्ग का निकटतम हवाई अड्डा मंगलुरु (140 किमी) और कन्नूर (90 किमी) है। मैसूर रेलवे स्टेशन (120 किमी) से कुर्ग (मडिकेरी) के लिए सुरम्य सड़क मार्ग से नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।