चिल्का झील एवं इरावदी डॉल्फ़िन, ओडिशा
एशिया का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून, नलबना पक्षी अभयारण्य, 10 लाख प्रवासी पक्षी और दुर्लभ इरावदी डॉल्फ़िन।
लद्दाख के 14,000 फीट ऊंचे खारे पानी के पैंगोंग त्सो से लेकर कश्मीर की डल झील के शिकारे, ओडिशा के एशिया के सबसे बड़े चिल्का लैगून, मणिपुर की तैरती लोकतक झील और राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर तक—भारत के 185 प्रमुख सरोवरों का सम्पूर्ण ज्ञानकोश।
एशिया का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून, नलबना पक्षी अभयारण्य, 10 लाख प्रवासी पक्षी और दुर्लभ इरावदी डॉल्फ़िन।
14,270 फीट पर 134 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय झील, जो दिन भर में नीले, हरे और बैंगनी रंग बदलती है।
कश्मीर का नगीना, पानी पर तैरते नक्काशीदार लकड़ी के हाउसबोट, सुबह की तैरती सब्जी मंडी और शिकारा सवारी।
पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, पानी पर तैरते प्राकृतिक द्वीप (फुमदी) और केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क।
1362 ई. में बंजारे द्वारा निर्मित झील, शांत जल के मध्य स्थित सफेद संगमरमरी जग निवास पैलेस और मेवाड़ विरासत।
एशिया का सबसे बड़ा मानव-निर्मित पक्का सरोवर, भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचना स्थली और गीता जयंती का महातीर्थ।
भारत में झीलों की उत्पत्ति विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से हुई है। हिमालय के उच्च शिखरों में हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से चंद्रताल, गुरुडोंगमार और त्सोमगो जैसी पवित्र हिमनद झीलें बनी हैं। कश्मीर की वुलर झील टेक्टोनिक हलचलों से बनी है। महाराष्ट्र की लोनार झील 50,000 वर्ष पूर्व उल्कापिंड के धरती से टकराने से बनी विश्व की दुर्लभ खारे पानी की क्रेटर झील है। तटीय क्षेत्रों में समुद्र के मुहाने पर चिल्का और पुलीकट जैसी लैगून झीलें बनी हैं।
सर्दियों में जब साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप में भीषण बर्फबारी होती है, तो लाखों प्रवासी पक्षी (फ्लेमिंगो, बार-हेडेड गीज, पेंटेड स्टॉर्क) भारत के जलाशयों में आते हैं। भारत सरकार ने 85 से अधिक आर्द्रभूमियों को 'रामसर कन्वेंशन' के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया है। ये झीलें न केवल जैव विविधता की रक्षा करती हैं बल्कि भूजल पुनर्भरण और बाढ़ नियंत्रण का भी कार्य करती हैं।
झीलों के किनारे slow-travel का अनुभव मन को गहरी शांति प्रदान करता है। कश्मीर की डल झील में हाउसबोट स्टे, उदयपुर की पिछोला में सूर्यास्त नौकायन, और चिल्का में इरावदी डॉल्फ़िन को देखना अद्वितीय अनुभव हैं। झीलों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक कचरा, साबुन या पॉलिथीन पानी में न फेंके।
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील लगभग 50,000 वर्ष पूर्व 20 लाख टन वजनी एक उल्कापिंड के 90,000 किमी/घंटा की गति से पृथ्वी से टकराने से बनी थी। यह बेसाल्ट चट्टान में बना विश्व का एकमात्र हाइपर-वेलोसिटी क्रेटर है जिसका जल अत्यधिक खारा और क्षारीय (Alkaline) है।
जम्मू और कश्मीर के बांदीपोरा जिले में स्थित 'वुलर झील' (Wular Lake) भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह झेलम नदी द्वारा पोषित होती है और इसका क्षेत्रफल मौसम के अनुसार 30 से 260 वर्ग किमी तक विस्तृत होता है।
राजस्थान के उदयपुर को 'झीलों की नगरी' कहा जाता है। यहाँ पिछोला झील, फतेह सागर, उदय सागर, स्वरूप सागर और दूध तलाई जैसी आपस में जुड़ी हुई ऐतिहासिक कृत्रिम झीलों की शृंखला है।