कैलाश मंदिर एवं एलोरा गुफाएं, छत्रपति संभाजीनगर
यूनेस्को विश्व धरोहर राष्ट्रकूट काल में एक ही विशाल बेसाल्ट चट्टान को ऊपर से नीचे तराश कर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म मंदिर।
सह्याद्रि की गगनचुंबी पहाड़ियों पर लहराती छत्रपति शिवाजी महाराज की अमर भगवा पताका, अजंता और एलोरा की पाषाण-शिल्प गुफाएं, पांच पावन ज्योतिर्लिंग और कोंकण का सुरम्य समुद्र तट महाराष्ट्र को अदम्य ऊर्जा प्रदान करते हैं।
यूनेस्को विश्व धरोहर राष्ट्रकूट काल में एक ही विशाल बेसाल्ट चट्टान को ऊपर से नीचे तराश कर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म मंदिर।
वाघोरा नदी के अर्धचंद्राकार मोड़ पर दूसरी सदी ई.पू. से निर्मित 30 शैलकृत बौद्ध गुफाएं और विश्वप्रसिद्ध भित्ति चित्र (जातक कथाएं)।
अरब सागर तट पर ब्रिटिश राज का प्रवेश द्वार, ऐतिहासिक ताज महल पैलेस होटल और 'क्वीन्स नेकलेस' के रूप में चमकती मरीन ड्राइव।
छत्रपति शिवाजी महाराज की पावन राजधानी जहाँ 6 जून 1674 को उनका ऐतिहासिक राज्याभिषेक हुआ, नगाड़ा खाना, टकमक टोक व समाधि।
1732 ई. में पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा निर्मित शनिवार वाड़ा, ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा और तानाजी मालुसरे के शौर्य का साक्षी सिंहगढ़।
महाराष्ट्र का सबसे प्राचीन और विशाल राष्ट्रीय उद्यान, विदर्भ के घने सागौन के जंगल और रॉयल बंगाल टाइगर की सर्वाधिक दृश्यता।
महाराष्ट्र का इतिहास सातवाहन, वाकाटक, चालुक्य, राष्ट्रकूट और यादव राजवंशों के वैभव से प्रारंभ होकर 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित 'हिंदवी स्वराज्य' के महान आंदोलन में परिवर्तित हुआ। बाजीराव प्रथम सहित पेशवाओं के काल में मराठा साम्राज्य का विस्तार अटक से कटक तक हुआ। 19वीं-20वीं सदी में समाज सुधारक ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सामाजिक क्रांति और स्वतंत्रता चेतना का नेतृत्व किया।
महाराष्ट्र का भौगोलिक आधार दक्कन का बेसाल्टिक लावा पठार है। पश्चिम में अरब सागर के समानांतर खड़ी सह्याद्रि (पश्चिमी घाट) पर्वतमाला उत्तर से दक्षिण तक फैली है। गोदावरी (दक्षिण की गंगा) का उद्गम नासिक के त्र्यंबकेश्वर से होता है। कृष्णा और भीमा नदियां दक्षिणी पठार को सिंचित करती हैं। कास पठार (यूनेस्को धरोहर) मानसून के बाद रंग-बिरंगे जंगली फूलों से ढक जाता है। बुलढाणा में स्थित 50,000 वर्ष पुरानी लोनार क्रेटर झील उल्कापिंड के टकराने से बनी विश्व की दुर्लभ खारे पानी की झील है।
महाराष्ट्र की संस्कृति वारकरी संप्रदाय (संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम) की आषाढ़ी एकादशी वारी यात्रा और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा प्रेरित गणेशोत्सव में प्रकट होती है। लावणी नृत्य, पोवाड़ा (वीरगाथा गायन) और तमाशा यहाँ की लोक विधाएं हैं। पैठणी साड़ी और कोल्हापुरी चप्पल अपनी दस्तकारी के लिए प्रसिद्ध हैं। मिसल पाव, वड़ा पाव, पूरन पोली, पिठला भाकरी और मोदक यहाँ के लोकप्रिय व्यंजन हैं।
महाराष्ट्र की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सुखद है। हालांकि, सह्याद्रि के 350+ किलों की ट्रैकिंग, दूधिया झरनों और हरी वादियों के अनुभव के लिए मानसून (जुलाई-सितंबर) का समय ट्रेकर्स का पसंदीदा मौसम है। कोंकण रेलवे से यात्रा करना विश्व के सबसे खूबसूरत ट्रेन मार्गों में से एक है।
भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से सर्वाधिक 5 ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में स्थित हैं: 1. त्र्यंबकेश्वर (नासिक), 2. भीमाशंकर (पुणे), 3. घृष्णेश्वर (छत्रपति संभाजीनगर), 4. औंढा नागनाथ (हिंगोली), और 5. परली वैजनाथ (बीड)।
एलोरा की गुफा संख्या 16 में स्थित कैलाश मंदिर किसी पत्थर को जोड़कर नहीं, बल्कि पूरी पहाड़ी को ऊपर से नीचे की ओर काटकर (Top-down monolithic excavation) बनाया गया है। इसमें अनुमानतः 2,00,000 टन बेसाल्ट पत्थर हटाया गया था।
सतारा के निकट कास पठार पर 850 से अधिक प्रजातियों के जंगली फूल खिलते हैं। इसे देखने का सर्वोत्तम समय अगस्त के अंत से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक होता है।
अरब सागर के भीतर स्थित मुरुद-जंजीरा एक अभेद्य जलदुर्ग (Marine Fort) है। सिद्दी शासकों द्वारा निर्मित इस किले को डच, पुर्तगाली, मराठा और अंग्रेज कोई भी सेना कभी युद्ध में जीत नहीं सकी।