डल झील एवं चार चिनार शिकारा, श्रीनगर
कश्मीर का नगीना, पानी पर तैरते नक्काशीदार लकड़ी के हाउसबोट, सुबह की तैरती सब्जी मंडी, चार चिनार द्वीप और हजरतबल दरगाह।
झेलम और चिनाब की पावन धाराओं, डल झील में तैरते शिकारे, गुलमर्ग की विश्वस्तरीय बर्फीली ढलानों, पहलगाम की बेताब घाटी और त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान मां वैष्णो देवी के अलौकिक दरबार से सुशोभित जम्मू और कश्मीर धरती का साक्षात स्वर्ग है।
कश्मीर का नगीना, पानी पर तैरते नक्काशीदार लकड़ी के हाउसबोट, सुबह की तैरती सब्जी मंडी, चार चिनार द्वीप और हजरतबल दरगाह।
विश्व की दूसरी सबसे ऊंची केबल कार (गंडोला) जो 3,980 मीटर की ऊंचाई तक ले जाती है, एशिया का सर्वश्रेष्ठ स्की रिसॉर्ट और अल्पाइन गोल्फ कोर्स।
लिद्दर नदी के किनारे चीड़ के वनों से घिरी सुरम्य वादियां, बेताब घाटी, चंदनवाड़ी (अमरनाथ यात्रा का आधार शिविर) और बाइसरन (मिनी स्विट्जरलैंड)।
त्रिकुटा पर्वत की पवित्र प्राकृतिक गुफा में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वयंभू तीन पिंडी, 13 किमी का पावन भक्ति मार्ग और भैरव घाटी।
समुद्र तल से 3,888 मीटर पर स्थित प्राकृतिक हिमलिंग जहाँ भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व की अमर कथा सुनाई थी, वार्षिक श्रावणी यात्रा।
गोपाद्री पहाड़ी पर स्थित 200 ई.पू. का भगवान शिव मंदिर जहाँ आदि शंकराचार्य ने 'सौंदर्य लहरी' की रचना की, निशात और शालीमार बाग।
कल्हण की 12वीं सदी की 'राजतरंगिणी' के अनुसार कश्मीर घाटी मूलतः कश्यप ऋषि द्वारा सतीसर झील को सुखाकर बसाई गई भूमि है। सम्राट अशोक और कनिष्क (जिसने कुंडलवन में चतुर्थ बौद्ध संगीति आयोजित की) ने यहाँ बौद्ध धर्म का विस्तार किया। 8वीं सदी में कर्कोट वंश के ललितादित्य मुक्तापीड़ ने मार्तंड के भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण कराया और कश्मीर को वैश्विक साम्राज्य का केंद्र बनाया। कश्मीर शैव दर्शन (अभिनवगुप्त) भारतीय दर्शन का शिखर है। 1947 में महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
जम्मू और कश्मीर पीर पंजाल और महान हिमालय शृंखलाओं के मध्य स्थित है। दक्षिण में जम्मू की शिवालिक पहाड़ियां हैं, मध्य में झेलम नदी की विस्मयकारी कश्मीर घाटी है। वुलर झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है। रियासी में चेनाब नदी पर बना 359 मीटर ऊंचा चेनाब रेलवे आर्क ब्रिज पेरिस के एफिल टॉवर से भी ऊंचा विश्व का सर्वोच्च रेल पुल है।
कश्मीर की संस्कृति 'कश्मीरीयत'—हिंदू-मुस्लिम सद्भाव, सूफी संतों (नूरुद्दीन वली / नंद ऋषि) और लल्लेश्वरी (ललद्यद) की वाणियों में बसी है। पश्मीना शॉल, जाफरानी केसर (GI टैग), अखरोट की काष्ठ नक्काशी और पेपर-मेशी कला विश्व प्रसिद्ध हैं। कश्मीरी कहवा (केसर, इलायची और बादाम युक्त चाय), 36 व्यंजनों का 'वाजवान' दावत, रोगन जोश, गुश्ताबा, मोदुर पुलाव और कलारी चीज यहाँ के प्रमुख स्वाद हैं।
कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन देखने का सबसे अच्छा समय अप्रैल का महीना होता है (एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन)। सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) में गुलमर्ग में भारी हिमपात होता है जो स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के लिए विश्वस्तरीय है। जम्मू से श्रीनगर के बीच हाल ही में शुरू हुई वंदे भारत और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) ने यात्रा को अत्यंत सुगम बना दिया है।
अनंतनाग के मट्टन में 8वीं सदी में कर्कोट वंश के महान सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ द्वारा निर्मित यह मंदिर प्राचीन कलिंग, गुप्त और गांधार शैली का अनूठा संगम था। इसके विशाल पाषाण स्तंभ और नक्काशी आज भी प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग की भव्यता दर्शाते हैं।
गुलमर्ग गंडोला दो चरणों (फेज 1 कोंगडूरी 2,600 मी और फेज 2 अफरवत 3,980 मी) में संचालित होता है। अत्यधिक मांग के कारण इसके टिकट जम्मू-कश्मीर केबल कार कॉर्पोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर 1-2 महीने पहले ऑनलाइन बुक करने पड़ते हैं।
पुलवामा के पांपोर क्षेत्र की विशिष्ट 'करेवा' मिट्टी और ठंडी जलवायु में उगने वाले कश्मीरी केसर में क्रोसिन (रंग), पिक्रोक्रोसिन (स्वाद) और सफ्रानल (सुगंध) का स्तर दुनिया के किसी भी अन्य देश (जैसे ईरान या स्पेन) के केसर से कहीं अधिक होता है।
कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा सभी श्रद्धालुओं को निःशुल्क डिजिटल आरएफआईडी यात्रा कार्ड जारी किया जाता है। इसके बिना बाणगंगा चेकपोस्ट से भवन की ओर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती।