अल्लेप्पी (अलप्पुझा) बैकवाटर्स एवं हाउसबोट
वेम्बनाड झील के लैगून और नहरों का जाल, पारंपरिक केतुवल्लम (हाउसबोट) में रात्रि विश्राम और शांत ग्रामीण तटीय जीवन।
अरब सागर की नीली लहरों, वेम्बनाड झील के शांत बैकवाटर्स, पश्चिमी घाट की हरी-भरी पहाड़ियों और अनामुडी के सर्वोच्च शिखर से अलंकृत केरल भारत का सर्वाधिक साक्षर एवं प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध तटीय राज्य है।
वेम्बनाड झील के लैगून और नहरों का जाल, पारंपरिक केतुवल्लम (हाउसबोट) में रात्रि विश्राम और शांत ग्रामीण तटीय जीवन।
1,600 मीटर की ऊंचाई पर फैले अंतहीन चाय के बगान, दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर अनामुडी और दुर्लभ नीलगिरि तहर का घर।
चीनी मछली पकड़ने के जाल (Chinese Fishing Nets), 1503 ई. का सेंट फ्रांसिस चर्च, यहूदी सिनेगॉग और डच पैलेस की बहुसांस्कृतिक विरासत।
कृत्रिम पेरियार झील में नौका सफारी, जंगली हाथी, गौर, सांभर और इलायची की पहाड़ियों (कार्डमम हिल्स) की प्राकृतिक सुगंध।
अरब सागर के ऊपर खड़ी लाल लेटराइट चट्टानें (नॉर्थ क्लिफ), प्राकृतिक खनिज झरने और सूर्यास्त का सम्मोहक दृश्य।
नवपाषाण काल के शैलचित्रों से युक्त एडक्कल गुफाएं, बाणासुर सागर बांध (भारत का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध) और घने वर्षावन।
केरल का इतिहास सहस्राब्दियों प्राचीन वैश्विक मसाला व्यापार से जुड़ा है। प्राचीन मुज़िरिस बंदरगाह से रोमन साम्राज्य, यूनानियों, अरबों और चीनियों के साथ काली मिर्च और इलायची का व्यापार होता था। चेर साम्राज्य, कोझिकोड के ज़ामोरिन (सामूतिरी) और त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा (जिन्होंने 1741 के कोलाचेल युद्ध में डच ईस्ट इंडिया कंपनी को पराजित किया) ने केरल के इतिहास को गढ़ा।
केरल की भौगोलिक संरचना अद्वितीय है: 580 किमी लंबा अरब सागर तट, 44 नदियां और अनगिनत लैगून-झीलें जो मिलकर प्रसिद्ध 'बैकवाटर्स' बनाती हैं। पूर्व में पश्चिमी घाट की दीवार इसे तमिलनाडु से अलग करती है। अनामुडी (2,695 मी) हिमालय के दक्षिण में भारत का सर्वोच्च पर्वत शिखर है। साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान उष्णकटिबंधीय वर्षावनों और दुर्लभ लायन-टेल्ड मकाक का अंतिम प्राकृतिक आवास है।
कथकली (शास्त्रीय नृत्य नाटिका), मोहिनीअट्टम, थेय्यम (उत्तरी केरल का अग्नि अनुष्ठान नृत्य) और कलारिपयट्टू (विश्व की प्राचीनतम युद्धकला) केरल की सांस्कृतिक आत्मा हैं। ओणम के अवसर पर पुलीकली (बाघ नृत्य) और वल्लम कली (सांप नौका दौड़) का रोमांच अद्वितीय होता है। केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला 26+ व्यंजनों का 'सद्या' भोज, अप्पम-स्टू और मालाबार बिरयानी यहाँ के खानपान के रत्न हैं।
केरल भ्रमण के लिए सितंबर से मार्च का मौसम सबसे सुहावना रहता है। हालांकि, पारंपरिक आयुर्वेदिक पंचकर्म और कायाकल्प के लिए मानसून (जून-अगस्त) का समय सबसे गुणकारी माना जाता है क्योंकि इस दौरान वातावरण में नमी और रोमछिद्र खुले होते हैं। अल्लेप्पी से कोल्लम के बीच की 8 घंटे की सरकारी बोट क्रूज़ slow-travel का सबसे सस्ता और सुंदर माध्यम है।
तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु 'अनंतशयन' मुद्रा में विराजमान हैं। यह मंदिर अपने द्रविड़ स्थापत्य, स्वर्ण गोपुरम और भूमिगत गुप्त कक्षों (Vaults) के अकूत खजाने के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है।
सरकारी मान्यता प्राप्त (DTPC Approved) हाउसबोट ही बुक करें। दिन की क्रूज़ के साथ बैकवाटर्स में सूर्यास्त और रात में शांत लैगून में लंगर डालने का अनुभव लें। भोजन में प्रामाणिक केरल कप्पा और करीमीन मछली परोसी जाती है।
मुन्नार की पहाड़ियों पर उगने वाला दुर्लभ नीलकुरिंजी (Strobilanthes kunthiana) पुष्प प्रत्येक 12 वर्ष में केवल एक बार खिलता है, जिससे पूरी घाटियां बैंगनी-नीले रंग की चादर से ढक जाती हैं।
थेय्यम मुख्य रूप से उत्तरी केरल के कन्नूर और कासरगोड जिलों के ग्रामीण कावों (पवित्र उपवनों) में अक्टूबर से मई के मध्य रात्रि के समय आयोजित होता है।