महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी महाकाल, भस्म आरती, क्षिप्रा तट पर सिंहस्थ महाकुंभ और श्री महाकाल लोक का भव्य विस्तार।
विंध्य और सतपुड़ा की प्राचीन पर्वत शृंखलाओं, पावन नर्मदा की कलकल धारा, खजुराहो के अद्भुत पाषाण शिल्प और सर्वाधिक बाघों की दहाड़ से सुशोभित मध्य प्रदेश भारतीय संस्कृति का शाश्वत केंद्र है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी महाकाल, भस्म आरती, क्षिप्रा तट पर सिंहस्थ महाकुंभ और श्री महाकाल लोक का भव्य विस्तार।
चंदेल शासकों द्वारा 950-1050 ई. में निर्मित नागर शैली के विश्व धरोहर मंदिर, कंदरिया महादेव और अद्वितीय मूर्तिकला।
सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में निर्मित बौद्ध स्तूप, तोरण द्वार की जातक कथाएं और विश्व शांति का शाश्वत प्रतीक।
भारत का 'जिब्राल्टर' कहा जाने वाला मान मंदिर महल, गुजरी महल, सास-बहू मंदिर और तेली का मंदिर की विस्मयकारी स्थापत्य कला।
रुडयार्ड किपलिंग की 'द जंगल बुक' की प्रेरणा स्थली, साल और बांस के सघन वन, मध्य भारत का दलदली हिरण (बारहसिंगा) व रॉयल बंगाल टाइगर।
बेतवा तट पर बुंदेला शासकों की प्राचीन राजधानी, जहाँ भगवान राम को राजा के रूप में सशस्त्र सलामी दी जाती है, चतुर्भुज मंदिर व छतरियां।
मध्य प्रदेश का इतिहास मौर्य सम्राट अशोक (उज्जैन के राज्यपाल), गुप्त वंश, प्रतिहार, चंदेल, परमार (राजा भोज) और बुंदेला शासकों के पराक्रम से आलोकित है। धार के राजा भोज ने विद्या और स्थापत्य को अभूतपूर्व प्रोत्साहन दिया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर में अपने प्राणों की आहुति दी तथा तांत्या भील व रानी दुर्गावती के शौर्य ने इस धरा को अमर बना दिया।
भारत के केंद्र में स्थित मध्य प्रदेश को 'नदियों का मायका' कहा जाता है क्योंकि यहाँ से नर्मदा, ताप्ती, सोन, बेतवा और चम्बल जैसी जीवनदायिनी नदियां निकलती हैं। विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत शृंखलाएं राज्य के पारिस्थितिक आधार हैं। भारत में सर्वाधिक वन क्षेत्र और सर्वाधिक बाघ (टाइगर स्टेट) मध्य प्रदेश में ही पाए जाते हैं। भेड़ाघाट की सफेद संगमरमरी चट्टानों के बीच नर्मदा का धुआंधार जलप्रपात प्रकृति का अलौकिक चमत्कार है।
गोंड, बैगा, भील और कोरकू जनजातियों की समृद्ध लोक संस्कृति मध्य प्रदेश की आत्मा है। पिथोरा और गोंड चित्रकला को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। चंदेरी और महेश्वरी रेशमी साड़ियों का निर्माण सदियों पुरानी पारंपरिक हथकरघा परंपरा है। इंदौरी पोहा-जलेबी, दाल बाफले, मालवा का भुट्टे का कीस और भोपाल का सुलेमानी चाय खानपान की पहचान हैं। खजुराहो नृत्य समारोह और तानसेन संगीत समारोह शास्त्रीय कला के वैश्विक मंच हैं।
मध्य प्रदेश की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे आदर्श है। ग्रीष्मकाल (अप्रैल-जून) में वन्यजीव अभयारण्यों में बाघ देखने की संभावना सबसे अधिक होती है। भोपाल, इंदौर और जबलपुर सभी प्रमुख राष्ट्रीय महानगरों से हवाई और सुपरफास्ट रेल सेवाओं द्वारा जुड़े हैं। slow-travel के तहत ओरछा, मांडू और महेश्वर में ऐतिहासिक हेरिटेज होटलों में ठहरने का अनुभव अवश्य लें।
2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए, जो पूरे भारत में सर्वाधिक हैं। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा जैसे शीर्ष राष्ट्रीय उद्यानों के कारण इसे टाइगर स्टेट कहा जाता है।
भस्म आरती प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक होती है। इसके लिए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की आधिकारिक वेबसाइट shrimahakaleshwar.com पर अग्रिम ऑनलाइन अनुमति आवश्यक होती है।
मालवा के सुल्तानों द्वारा बसाई गई मांडू अपने मानसूनी सौंदर्य, जहाज महल, हिंडोला महल और बाज बहादुर व रानी रूपमती की अमर प्रेम कथा के कारण ऐतिहासिक काल से 'शादियाबाद' (आनंद की नगरी) कहलाती है।
भीमबेटका के पाषाण आश्रय लगभग 30,000 वर्ष प्राचीन हैं जो पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के मानव जीवन, शिकार और नृत्य को प्राकृतिक रंगों में दर्शाते हैं।